बालोद।जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सिवनी अंतर्गत जीवनदायिनी तांदुला नदी के डुबान क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सामने आया है। दर्जनों किसान नदी के डुबान क्षेत्र में अवैध रूप से खेती कर रहे हैं। खरीफ के साथ-साथ ग्रीष्मकालीन धान की फसल भी ली जा रही है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया है और तांदुला का अस्तित्व संकट में बताया जा रहा है।
जल संरक्षण की दिशा में सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर दिव्या मिश्रा के निर्देश पर गुरुवार को प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। इस दौरान बालोद एसडीएम, तहसीलदार, जल संसाधन विभाग के एसडीओ सहित राजस्व विभाग की टीम ने डुबान क्षेत्र का निरीक्षण किया और अतिक्रमण कर खेती कर रहे किसानों को समझाइश दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नदी के डुबान क्षेत्र में की जा रही खेती गैरकानूनी है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
प्रशासन की समझाइश के बावजूद अतिक्रमणधारी किसान अपनी बात पर अड़े रहे। किसानों का कहना था कि वे कई वर्षों से यहां खेती कर रहे हैं और यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। हालांकि बातचीत के दौरान किसानों ने यह भी स्वीकार किया कि यह खेती अतिक्रमण के दायरे में आती है। प्रशासन ने उन्हें वैकल्पिक समाधान की बात कहते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार की खेती नहीं करने की चेतावनी दी।
मौके पर स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब बालोद विधायक संगीता सिन्हा भी वहां पहुंचीं। विधायक ने किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का हवाला देते हुए प्रशासन से इस बार खेती करने देने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यहां खेती करने वाले किसानों की आजीविका अचानक समाप्त करना उचित नहीं होगा और कोई संतुलित रास्ता निकाला जाना चाहिए।
तांदुला नदी बालोद जिले के लिए पेयजल और सिंचाई की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि डुबान क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण और खेती से नदी का प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है। प्रशासन का कहना है कि तांदुला को अतिक्रमण से मुक्त कराना प्राथमिकता है और जल संरक्षण के हित में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन और किसानों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासनिक निर्णय और संभावित कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




















