कथा का शुभारंभ 4 जनवरी को प्रातः 10 बजे विधिवत कलश स्थापना के साथ हुआ। वेद मंत्रोच्चार, मंगल ध्वनि और जयघोष के बीच मातृशक्ति द्वारा कलश स्थापित किया गया। इसके पश्चात प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 7 बजे तक श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराया गया।
कथा प्रवचन श्री धाम अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य श्री रवि मोहन जी महाराज द्वारा किया गया। उन्होंने सरल भाषा, ओजस्वी वाणी और मधुर भजनों के माध्यम से भागवत के गूढ़ तत्वों को जन-जन तक पहुँचाया।

कथा के दौरान प्रथम दिवस विष्णु-लक्ष्मी चरित्र, द्वितीय दिवस शिव विवाह महोत्सव, तृतीय दिवस वामन अवतार का वर्णन किया गया। 7 जनवरी को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा का विशेष आकर्षण रहा। नंदोत्सव के दौरान पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो” के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद 8 जनवरी को बाल लीलाएँ, 9 जनवरी को रुक्मिणी विवाह तथा 10 जनवरी को भक्त सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण सात्त्विक और अनुशासित रहा। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता उल्लेखनीय रही। कथा स्थल को आकर्षक सजावट और धार्मिक झांकियों से सुसज्जित किया गया था।
11 जनवरी 2026 को प्रातः 11 बजे हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विश्व शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई। इसके पश्चात दोपहर 1 बजे से महाप्रसाद वितरण किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में श्री राम जी का मायरा परिवार संघ के संरक्षक सुरेश गोयल (खेदड़िया), ठंडीराम गर्ग, नवरंगलाल जिंदल, तनसुख राय गोयल, रमेश मित्तल, शकुंतला अग्रवाल, शीतल गोयल सहित संघ के समस्त सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। समापन अवसर पर आयोजकों ने कथा प्रवक्ता एवं श्रद्धालुजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।




















