जहां हाल ही में भाजपा ने इसे विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम बताया था, वहीं अब कांग्रेस ने इसे ग्रामीण भारत की आत्मा पर हमला करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

शनिवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव व छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सहप्रभारी डॉ. एस.ए. संपत कुमार ने स्थानीय राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म कर श्रमिकों से उनका काम का अधिकार छीन लिया है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून में किया गया परिवर्तन श्रमिक-विरोधी है और यह महात्मा गांधी के आदर्शों व ग्राम स्वराज की सोच पर सीधा प्रहार है।
डॉ. संपत कुमार ने कहा कि अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित गारंटी थी, लेकिन नया फ्रेमवर्क इसे एक कंडीशनल और केंद्र द्वारा नियंत्रित योजना में बदल देता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘सुधार’ के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस सहप्रभारी ने कहा कि मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास का जीवंत उदाहरण था, लेकिन सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटाया बल्कि देश के 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को बेरहमी से कुचल दिया।
उन्होंने कहा कि दो दशकों से मनरेगा ग्रामीण परिवारों की लाइफलाइन रही है और कोविड-19 जैसे संकट में यह आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हुई थी।
डॉ. संपत कुमार ने आगे कहा कि नया सिस्टम हर साल तय समय के लिए जबरन रोजगार बंद करने की अनुमति देता है, जिससे यह तय होगा कि गरीब कब काम करेंगे और कब भूखे रहेंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र अब राज्यों पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहता है, जिसमें 60:40 की नई वित्तीय हिस्सेदारी से राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ेगा।
उनका कहना था कि जैसे-जैसे बजट का बोझ राज्यों पर पड़ेगा, वैसे-वैसे मनरेगा योजना खत्म होने की ओर बढ़ेगी।
उन्होंने 100 दिन से 125 दिन रोजगार के दावे को भी छलावा बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार आने के बाद 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से काम नहीं दिया जा रहा है।
डॉ. संपत कुमार के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में मनरेगा में औसतन केवल 38 दिन ही काम मिला है, यानी केंद्र सरकार किसी भी वर्ष 100 दिन का रोजगार देने में विफल रही है।
प्रेसवार्ता के दौरान पूर्व विधायक भैयाराम सिन्हा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, कृष्णा दुबे, रामजी भाई पटेल, मिथलेश नूरेटी,अंचल प्रकाश , बंटी शर्मा, कमलेश श्रीवास्तव,सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बालोद जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना साहू ने जी-राम-जी योजना को गरीबों के उत्थान की दिशा में कदम बताते हुए 125 दिन रोजगार और 7 दिन में भुगतान का दावा किया था।
लेकिन कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मजदूरों और दलितों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बताया है।
कुल मिलाकर, मनरेगा से जी-राम-जी तक का मुद्दा अब केवल योजना का नहीं रह गया है, बल्कि यह गरीब, मजदूर और ग्रामीण अधिकारों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई में तब्दील हो गया है।
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