
बालोद |ग्राम दुधली में चल रही प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि देश की विविधता को करीब से महसूस करने का अनुभव बन गई है। अलग-अलग राज्यों से पहुंचे रोवर-रेंजर्स, स्थानीय ग्रामीण और छात्र-छात्राएं—सब एक ही मंच पर संस्कृति, अनुशासन और सीख की साझा यात्रा में जुटे हैं।

हरियाणा के पलवल जिले से आई 11वीं कक्षा की छात्रा खुशी के लिए यह जंबूरी उम्मीदों से कहीं आगे निकली। वह कहती हैं, “जैसा सोचा था, उससे भी बेहतर अनुभव मिला। यहां सीखने को बहुत कुछ है।” अपनी टीम के साथ पहुंची खुशी ने छत्तीसगढ़ की हरियाली, सहज माहौल और गोंदली जलाशय के प्राकृतिक दृश्य को यादगार बताया। उनके शब्दों में, दुधली में सचमुच ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की झलक दिखती है—जहां अलग-अलग राज्यों की संस्कृति एक-दूसरे से घुल-मिल जाती है।

इसी टीम के रौनक ने यहां के सुहाने मौसम और खुले कैंप जीवन को खास बताया। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में एक-दो हफ्ते और रुकने का मन करता है।
जंबूरी में रोवर-रेंजर्स अनुशासन के साथ गतिविधियों में भाग ले रहे हैं—कहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कहीं सेवा-भाव, तो कहीं नेतृत्व और टीमवर्क का अभ्यास।

दूसरे दिन दुधली और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जंबूरी का अवलोकन किया। विभिन्न राज्यों के स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभागीय प्रदर्शनी सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। इन प्रदर्शनों के जरिए छत्तीसगढ़ की जनकल्याणकारी योजनाओं और जिला प्रशासन की उपलब्धियों को जानने-समझने का अवसर भी मिला।
हिमाचल प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड, सेंट्रल रेलवे सहित कई राज्यों से आए रोवर-रेंजर्स और स्काउट-गाइड्स ने आयोजन की खुले दिल से सराहना की। उनका कहना है कि ऐसे मंच पर भाषाओं, रीति-रिवाजों और जीवनशैली को करीब से जानना भविष्य के लिए बेहद उपयोगी अनुभव है। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, कला-संस्कृति और लोगों की सरलता-मधुरता ने सभी को प्रभावित किया।

इस भव्य आयोजन के लिए प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ सरकार और भारत स्काउट्स एवं गाइड्स का आभार जताया। दुधली में सजी यह जंबूरी देश की एकता, विविधता और युवाओं की ऊर्जा का जीवंत उत्सव बनकर उभर रही




















