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कुपोषण मुक्त बालोद की दिशा में प्रशासन सख्त,बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर महिला सशक्तिकरण तक,कलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग को दिए स्पष्ट निर्देश

बालोद | कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने सोमवार को संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक लेकर जिले में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तार से जायजा लिया। बैठक का मुख्य फोकस कुपोषण की प्रभावी रोकथाम, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और जनकल्याणकारी योजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर रहा।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कुपोषण से निपटने के लिए सभी स्तरों पर ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाएं। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी से लेकर परियोजना अधिकारी, सुपरवाइजर और मैदानी अमले तक सतत मॉनिटरिंग पर जोर देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में परियोजनावार पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कुपोषित बच्चों की संख्या, उनकी सेहत में हुए सुधार और फॉलोअप की स्थिति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
नोनी सुरक्षा योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं योजना से लाभान्वित हो सकें। इसके साथ ही मिशन गोद के तहत गोद लिए गए बच्चों की स्थिति, पोषण ट्रैकर में की गई एंट्री, महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयास, महतारी वंदन योजना, छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण एवं सक्षम योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में स्वीकृत ऋण प्रकरणों की भी समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वर्तमान में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयं के भवनों में चल रहे केंद्रों, नगरीय निकायों में स्वीकृत एवं शेष आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति की जानकारी ली।
इसके अलावा जर्जर आंगनबाड़ी भवनों के स्थान पर नए भवनों की स्वीकृति, पेयजल सुविधा के लिए जारी राशि के उपयोग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु चल रही भर्ती प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी समीर पाण्डेय सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने अंत में कहा कि महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाएं सीधे समाज के भविष्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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