बालोद। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम और स्वरूप में बदलाव के प्रस्ताव के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 10 जनवरी से प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन शुरू करने जा रही है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री रतिराम कोसमा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल नाम परिवर्तन के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण गरीबों के काम के अधिकार, आजीविका और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की निर्णायक लड़ाई है।
कोसमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है, जो सीधे तौर पर ग्रामीण भारत पर हमला है। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के लिए जीवनरेखा है। इसका नाम बदलना या इसे कमजोर करना कांग्रेस को स्वीकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर को हुई बैठक में सर्वसम्मति से “मनरेगा बचाओ संग्राम” के नाम से 17 दिनों का चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 जनवरी को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर एक दिवसीय उपवास व प्रतीकात्मक विरोध किया जाएगा। 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, जनसंपर्क और संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे।
30 जनवरी को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा, जबकि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर कार्यालयों के समक्ष “मनरेगा बचाओ धरना” देकर वीबी-जी राम-जी विधेयक वापस लेने और मनरेगा को मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। 7 से 15 फरवरी तक पीसीसी के नेतृत्व में राज्य स्तरीय घेराव और 16 से 25 फरवरी के बीच एआईसीसी द्वारा चार क्षेत्रीय रैलियों के साथ आंदोलन का समापन होगा।
अंत में रतिराम कोसमा ने ग्रामीण जनता, मजदूरों और मनरेगा श्रमिकों से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस सड़क से सदन तक मनरेगा की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।




















