आस्था की डोर से बंधा नववर्ष
सुबह होते ही लोगों ने स्नान कर पूजा-अर्चना की और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थनाएं कीं। जिले के प्रमुख मंदिरों में दिन चढ़ते ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्ति के माहौल में “नया साल—नई उम्मीदें” की गूंज सुनाई दी।
गंगा मैया मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार
जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल गंगा मैया मंदिर, झलमला में नए साल के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखीं। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने माता के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर समिति की व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने सुकून के पल बिताए, वहीं परिसर में पिकनिक का आनंद भी लिया।

धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भीड़
नववर्ष के स्वागत में देर रात तक जश्न मनाने के बाद भी लोग पहले ही दिन धार्मिक और पर्यटन स्थलों की ओर निकल पड़े। रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई और धमतरी से आए सैलानियों ने जिले के विभिन्न स्थलों पर पहुंचकर मनोरंजन के साथ-साथ दर्शन किए और विश्व शांति की कामना की।

सियादेवी क्षेत्र में प्रकृति संग उत्सव
प्राकृतिक सुंदरता से घिरे सिया देवी मंदिर क्षेत्र में नए साल पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ रही। झरनों, चट्टानों और हरियाली के बीच लोगों ने पिकनिक मनाई, झूले-खेल का आनंद लिया और सामूहिक भोज के साथ खुशियां साझा कीं। कहा जाए तो नववर्ष के पहले दिन लोग प्रकृति की गोद में डूबे नजर आए।
उल्लास, भक्ति और उम्मीदों के साथ शुरुआत
कुल मिलाकर, बालोद जिले में नववर्ष 2026 की शुरुआत आस्था, प्रकृति और उत्सव के त्रिवेणी संगम के साथ हुई। लोगों ने बीते वर्ष को विदा कर नए साल का स्वागत नई उम्मीदों, सकारात्मक ऊर्जा और मंगल कामनाओं के साथ किया।




















