रायपुर/बालोद।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के लगभग 13 लाख तेंदूपत्ता एवं लघु वनोपज संग्राहक परिवारों के हित में लिए गए निर्णयों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। लघु वनोपज संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने इन फैसलों को वनांचल क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक बताया है।
यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि कैबिनेट द्वारा कोदो, कुटकी और रागी जैसे पोषक मोटे अनाजों की खरीद, प्रसंस्करण एवं बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने तथा अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए एकमुश्त 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय दूरगामी प्रभाव वाला है। इससे वनोपज आधारित आजीविका को स्थायित्व मिलेगा और संग्राहक परिवारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से लघु वनोपज संग्राहक परिवारों की यह मांग रही है कि उपज को केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उसके प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था बने। कैबिनेट के इन फैसलों से अब स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और वन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
यज्ञदत्त शर्मा ने यह भी कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन द्वारा ऋण पर गारंटी देने का निर्णय सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इससे तेंदूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान और बाजार में स्थिरता मिलेगी।
इन निर्णयों के लिए यज्ञदत्त शर्मा ने प्रदेश भाजपा प्रवक्ता देवलाल ठाकुर के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार आदिवासी, वनवासी और लघु वनोपज संग्राहक परिवारों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ देश में लघु वनोपज आधारित आजीविका मॉडल का उदाहरण बनेगा और आने वाले वर्षों में लाखों संग्राहक परिवार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे।




















