बालोद। बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके पुराने वैभव और स्वच्छ स्वरूप में लौटाने की दिशा में जिला प्रशासन ने निर्णायक पहल शुरू कर दी है। नीर चेतना अभियान के तहत तांदुला नदी के हीरापुर एनीकेट से रामघाट मंदिर तक जलकुंभी और गंदगी हटाने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग की निगरानी में तीन चैन मा
उंटेन मशीन और बुलडोजर लगाकर जलकुंभी की सफाई, गड्ढों से रेत निकालकर समतलीकरण का कार्य चल रहा है। इस उद्देश्य के लिए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

प्रशासन का मानना है कि वर्षों से जलकुंभी के कारण तांदुला नदी का प्रवाह और जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। पूर्व में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने प्रयास किए, लेकिन जलकुंभी दोबारा फैल जाती थी। इस बार कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में इसे जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि नदी दीर्घकाल तक स्वच्छ और प्रवाहमान रह सके।
इसी कड़ी में जिला मुख्यालय बालोद में तांदुला नदी के तट पर वृहद श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर नदी की साफ-सफाई की और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने का संकल्प लिया।

श्रमदान कार्यक्रम में राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू, भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, पद्मश्री शमशाद बेगम, पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख एवं पवन साहू,पुष्पेंद्र चंद्राकर ,की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इसके साथ ही जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक एवं नूतन कंवर, एडीशनल एसपी मोनिका ठाकुर, संयुक्त कलेक्टर मधुहर्ष, डिप्टी कलेक्टर प्राची ठाकुर सहित नगर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, मीडिया कर्मी, महिला कमांडो, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं, एनएसएस, रेडक्रॉस के सदस्य, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि तांदुला नदी को केवल एक दिन की सफाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि निरंतर जनभागीदारी से इसके संरक्षण और संवर्धन को आंदोलन का रूप दिया जाएगा। प्रशासन का संदेश स्पष्ट है—यदि आज जल स्रोतों को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। नीर चेतना अभियान इसी चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।




















