1885 से आज़ादी तक के संघर्ष पर विचार-मंथन
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कांग्रेस की स्थापना से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति तक के ऐतिहासिक संघर्षों को रेखांकित किया। वक्ताओं ने बताया कि 28 दिसंबर 1885 को स्थापित कांग्रेस ने 15 अगस्त 1947 तक देश को आज़ादी दिलाने के लिए जन-आंदोलन का नेतृत्व किया।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी सहित विकास चोपड़ा, कृष्णा दूबे, रत्ती राम कोसमा, संजय चंद्राकर, हरीश चंद्राकर, क्रांति भूषण साहू, प्रशांत वोकड़े और दिनाराम चेलक ने कांग्रेस के विभिन्न अधिवेशनों, ऐतिहासिक निर्णयों और स्वतंत्रता संग्राम में महापुरुषों के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
रवि जायसवाल ने अपने उद्बोधन में आज़ादी के बाद से अब तक कांग्रेस के उतार-चढ़ाव, समकालीन राजनीतिक चुनौतियों और संगठन को सशक्त बनाकर उनसे सामूहिक रूप से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कांग्रेस का इतिहास त्याग, सेवा और जनहित के लिए संघर्ष का इतिहास है।
वरिष्ठ कांग्रेसजनों का घर जाकर सम्मान
संगोष्ठी के समापन के बाद कार्यकर्ताओं ने संगठन के प्रति समर्पण की भावना को आगे बढ़ाते हुए जिले के वरिष्ठ कांग्रेसजनों के निवास पर पहुंचकर उनका शॉल और श्रीफल से आत्मीय सम्मान किया। इस दौरान बुजुर्ग कार्यकर्ताओं से आशीर्वाद लिया गया और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा के लिए आभार व्यक्त किया गया।
प्रमुख रूप से उपस्थित
कार्यक्रम में रामजी भाई पटेल, प्रेमचंद क्षीरसागर, ओमप्रकाश गजेंद्र, मिथलेश निरोटी, लता कोराम, यज्ञदेव पटेल, वैभव साहू, जितेंद्र यादव, राकेश ठाकुर, देवेंद्र साहू, पद्मिनी साहू, रवि जायसवाल, युवराज साहू, रेवा रावटे, समीर थ्रू, कुलदीप नौनारे और जीवन साहू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।




















