इस संबंध में चैंबर के प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न व्यापारिक संगठनों और चैंबर पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में आमाबेड़ा क्षेत्र में मिशनरियों द्वारा स्थानीय आदिवासी समाज पर कथित अत्याचार और प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैये पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।

धर्मांतरण के खिलाफ व्यापारी समाज एकजुट
बैठक को संबोधित करते हुए चैंबर अध्यक्ष सतीश थरानी ने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण एक गंभीर और चिंताजनक विषय बन चुका है। सुनियोजित तरीके से की जा रही गतिविधियों को रोकना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दुखद पहलू यह है कि कई मामलों में स्थानीय प्रशासन का रवैया निष्पक्ष नहीं दिख रहा, जो समाज में असंतोष को जन्म दे रहा है।
चैंबर पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि व्यापारी समाज इस तरह की घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर विरोध दर्ज कराएगा और बंद के माध्यम से अपनी बात मजबूती से रखेगा।
परिवहन और आवश्यक सेवाओं को लेकर संतुलन
पूर्व विधायक और चैंबर संरक्षक ऋचंद सुंदरानी ने बंद को सुव्यवस्थित रखने पर जोर देते हुए कहा कि विरोध का संदेश स्पष्ट और सशक्त होना चाहिए, लेकिन परिवहन और कच्चे माल से जुड़े व्यापारियों को न्यूनतम नुकसान हो, इसका भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
ट्रांसपोर्ट चैंबर अध्यक्ष हरचरण सिंह साहनी ने समाज के लिए धर्मांतरण को घातक बताते हुए ट्रांसपोर्ट जगत की ओर से ‘छत्तीसगढ़ बंद’ को शत-प्रतिशत समर्थन देने की घोषणा की।
सड़कों पर उतरकर होगा विरोध
चैंबर कार्यकारी अध्यक्ष राजेश वासवानी और जसप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि अब केवल प्रतीकात्मक बंद पर्याप्त नहीं है। व्यापारी समाज को सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश प्रकट करना होगा, ताकि इस तरह की समाज विरोधी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके। भाठागांव व्यापारी संघ के अध्यक्ष ने बंद के समर्थन में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की भी घोषणा की।


आम जनता से सहयोग की अपील
चैंबर ने प्रदेश की सभी इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापारियों को बंद की जानकारी दें और सहभागिता सुनिश्चित करें। 24 दिसंबर को व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे जाएंगे, जबकि मेडिकल स्टोर्स और पेट्रोल पंप खुले रहेंगे, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
अध्यक्ष सतीश थरानी ने आम नागरिकों और व्यापारियों से अपील की कि वे बंद से एक दिन पहले आवश्यक वस्तुओं की खरीद कर लें और शांतिपूर्ण तरीके से इस आंदोलन को सफल बनाएं।

एकजुटता ही समाधान
चैंबर नेतृत्व ने दोहराया कि व्यापारी समाज की एकजुटता ही इस तरह के अत्याचारों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। यह बंद केवल विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है।




















