स्थानीय लोगों के अनुसार भालू रात के समय शहर के नजदीक खुलेआम घूम रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भालू एक बार शहर के फायर ब्रिगेड कार्यालय तक भी पहुंच चुका है। गनीमत यह रही कि अब तक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है।

भालू की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन कार्रवाई केवल लोगों को सतर्क रहने और भालू के नजदीक न जाने की सलाह तक सीमित रही। देर रात तक भालू को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिशें की गईं, पर वह शहर से सटे जंगल में ही घुस गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के प्रयास अस्थायी होते हैं और भालू के दोबारा शहर में लौटने की आशंका बनी रहती है।

वन विभाग ने क्षेत्र को अलर्ट पर रखते हुए लोगों से अपील की है कि वे सप्तगिरि पार्क सहित आसपास के घने जंगलों, झाड़ियों और वन क्षेत्रों में न जाएं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल चेतावनी और अपील से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब भालू एक सप्ताह से शहर के आसपास सक्रिय है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइजेशन और रेस्क्यू जैसी ठोस रणनीति अपनाई जानी चाहिए थी।
लगातार भालू के विचरण से बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम टहलने वाले लोगों में भय का माहौल है। वहीं, वन विभाग की कथित लापरवाही और ढिलाई को लेकर आमजन में नाराज़गी भी साफ नजर आ रही है। लोगों की मांग है कि किसी अनहोनी से पहले वन विभाग जिम्मेदारी निभाते हुए भालू को सुरक्षित पकड़कर जंगल के भीतर छोड़े, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके और जन-जीवन सामान्य हो सके।




















