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जिले में गौ तस्करी बेखौफ, पैदल क्रूरता का खुलासा, गौ सेवकों को फंसाने की साजिश नाकाम, पुलिस ने कोचियों पर की कार्रवाई

पैदल गौ तस्करी का पर्दाफाश, एक्सपायरी लाइसेंस के सहारे क्रूरता, रोकने पहुंचे गौ सेवक बन रहे निशाना

बालोद। जिले में गौ तस्करी लगातार गंभीर होती जा रही है। एक ओर छत्तीसगढ़ शासन पशुधन विकास विभाग और गौ सेवा आयोग के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाएं संचालित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चंद पैसों के लालच में गौ तस्कर कानून और मानवता दोनों को चुनौती देते हुए बेखौफ तस्करी में लिप्त हैं। स्थिति यह हो गई है कि अब वाहन से तस्करी के बजाय पकड़े जाने के डर से तस्कर पैदल ही गौ माता को मारते-पीटते, अमानवीय तरीके से हांकते हुए ले जा रहे हैं।

शुक्रवार तड़के जिला मुख्यालय के पाररास क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां जिला गोधाम समिति गौ सेवा आयोग के सदस्य पुरुषोत्तम सिंह राजपूत, गौ सेवक नरेंद्र जोशी और बबलू तिवारी ने सड़क मार्ग से क्रूरता पूर्वक पैदल ले जाए जा रहे गौवंश को रोका और कोचियों से वैध दस्तावेजों की मांग की। पूछताछ के दौरान पहले कोचियों ने आनाकानी की, बाद में एक्सपायरी हो चुके लाइसेंस और खेरथा बाजार की रसीद दिखाकर रौब झाड़ने लगे। इतना ही नहीं, दबाव बनाने के उद्देश्य से अपने अन्य साथियों को भी मौके पर बुला लिया गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोधाम समिति सदस्य पुरुषोत्तम राजपूत ने तत्काल गोधाम समिति अध्यक्ष योगेश्वर यादव, सदस्य विनोद साहू, थाना प्रभारी बालोद शिशुपाल सिन्हा, नोडल मेजर दुर्योधन यादव सहित गौ सेवा आयोग के उच्चाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली बालोद पुलिस मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बिना मेडिकल सर्टिफिकेट, एक्सपायरी लाइसेंस और संदिग्ध बाजार रसीद के आधार पर गौवंश को पैदल ले जा रहे कोचियों पर विधि सम्मत कार्रवाई की।

पुलिस द्वारा जिन कोचियों पर कार्रवाई की गई, उनमें उमेश कुमार साहू निवासी जामगांव, हेमराज सोनकर निवासी बूढ़ा पारा बालोद, निर्भय साहू निवासी जामगांव, ओमप्रकाश देवांगन निवासी हथौद, तेजराम साहू निवासी जामगांव तथा आत्माराम सोनकर निवासी बूढ़ा पारा बालोद सहित अन्य शामिल हैं। सभी के खिलाफ थाना प्रभारी बालोद के निर्देशन में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

गौ सेवकों का कहना है कि जिले में गौ तस्करी अब एक संगठित रूप ले चुकी है। तस्कर पकड़े जाने की स्थिति में स्वयं को बचाने के लिए गौ सेवकों पर झूठे आरोप लगाने और उन्हें डराने-धमकाने की रणनीति अपनाते हैं, ताकि तस्करी का नेटवर्क बेरोकटोक चलता रहे। ऐसे मामलों में यदि समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो, तो गौ संरक्षण में लगे सेवकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

इस पूरी कार्रवाई में बजरंग दल के गौ सेवा प्रमुख प्रथम सोनी, प्रदीप मणिपाल, तुषार डिमर, दिलेश्वर सोनकर, खेमू यादव, मोनू यादव, प्रवीण सोनकर, राजा यादव सहित अनेक गौ सेवकों के साथ-साथ गोधाम समिति बालोद के पदाधिकारियों, नोडल मेजर दुर्योधन यादव तथा सिटी कोतवाली पुलिस स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

गौ सेवकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में बढ़ती पैदल गौ तस्करी पर सख्त निगरानी रखी जाए, बार-बार पकड़े जाने वाले तस्करों पर कठोर धाराएं लगाई जाएं और गौ सेवकों को फंसाने की साजिश रचने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गौवंश संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सके।

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