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खाद संकट पर कांग्रेस का हमला: सरकार किसानों को निजी दुकानों के भरोसे छोड़ रही – कांग्रेस

 रायपुर/बालोद। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों (सोसायटियों) के माध्यम से किसानों को मिलने वाले खाद वितरण के रेशियो में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि सोसायटियों में खाद की लिमिट 40 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत करना किसान विरोधी फैसला है, जिससे आगामी खरीफ सीजन में किसानों को भारी संकट का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पहले किसानों को कृषि ऋण में 60 प्रतिशत नकद राशि और 40 प्रतिशत खाद-बीज के रूप में सुविधा मिलती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत 70 प्रतिशत नकद और केवल 30 प्रतिशत खाद-बीज दिया जा रहा है। इससे किसानों को सहकारी समितियों में पर्याप्त खाद नहीं मिल पाएगा और वे निजी दुकानों पर निर्भर होने को मजबूर होंगे।


सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए नियम बदल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एनपीके खाद की कीमत में 180 रुपये प्रति बोरी और पोटाश में 300 रुपये प्रति बोरी वृद्धि पहले ही किसानों पर बोझ डाल चुकी है। अब लिमिट घटाने से संकट और गहरा जाएगा।
उन्होंने कहा कि डीएपी और यूरिया की कमी से किसान पहले से परेशान हैं। पिछले वर्षों में किसानों को निजी दुकानों से यूरिया 1000 से 1500 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 4000 रुपये तक खरीदना पड़ा, जबकि सरकारी दर इससे काफी कम है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर सहकारी समितियों में आपूर्ति कम कर निजी क्षेत्र को फायदा पहुंचा रही है।

बालोद जिले में भी कांग्रेस का विरोध तेज


गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि भाजपा सरकार किसान हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। खरीफ सीजन से पहले खाद संकट पैदा कर किसानों को परेशान किया जा रहा है। यदि जल्द पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराया गया तो कांग्रेस किसानों के साथ सड़क पर उतरेगी।

 


जिला पंचायत सदस्य मिथलेश निरोटी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान पहले ही खाद और बीज की चिंता में हैं। सरकार को चाहिए कि सोसायटियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराए, न कि कोटा घटाकर किसानों की परेशानी बढ़ाए।


कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद महंगा, डीजल महंगा और अब वितरण व्यवस्था भी कमजोर कर दी गई है। किसान इस दोहरी मार से त्रस्त हैं।


रत्ती राम कोसमा ने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। दूरदराज इलाकों में निजी दुकानों की मनमानी पहले से चल रही है, ऐसे में सोसायटियों का कोटा घटाना किसानों के साथ अन्याय है।

कांग्रेस ने दी चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार तुरंत खाद वितरण का पुराना रेशियो बहाल करे, सहकारी समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करे। ऐसा नहीं होने पर प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

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