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संवेदनशीलता की मिसाल: सड़क हादसे में घायल बंदर का इलाज, वन व पशु विभाग के साथ गौरक्षा समूह का समन्वय

बालोद।जिला मुख्यालय के इंदिरा चौक के पास अज्ञात वाहन की चपेट में आकर एक बंदर के गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े होने की सूचना मिलते ही बालोद गौरक्षा अभियान समूह के सदस्य तत्काल मौके पर पहुंचे। सेवकों ने बिना देरी किए घायल बंदर को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया और उसकी जान बचाने के लिए समन्वित प्रयास शुरू किए।

सूचना मिलते ही पशु विभाग के डॉक्टर सिहारे घटनास्थल पर पहुंचे और घायल बंदर का आवश्यक उपचार किया। उपचार के पश्चात वन परिक्षेत्र अधिकारी रामनाथ टेकाम के सहयोग से बंदर को वन विभाग के पिंजरे में सुरक्षित रखा गया, ताकि उसके स्वास्थ्य में सुधार होने तक समुचित देखरेख सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर गौ सेवक नरेंद्र जोशी ने बताया कि बालोद जिले में गौरक्षा अभियान से जुड़े सेवक अपने स्तर पर 24 घंटे सेवा में तत्पर रहते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में घायल, बीमार अथवा लाचार गौ माता एवं अन्य जीव-जंतुओं को उपचार के लिए अस्पतालों और गौधामों तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने संसाधनों और जीव-रक्षा एंबुलेंस के अभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि समय पर सुविधा न मिलने से कई बार जीव-जंतुओं को बचाया नहीं जा पाता, जो सेवकों के लिए अत्यंत पीड़ादायक होता है।

इस मानवीय प्रयास में जीव प्रेमी प्रथम सोनी, प्रदीप मीनपाल, सोनू सैन, आशीष यादव और आयुष जसूजा का विशेष सहयोग रहा। स्थानीय लोगों ने भी गौरक्षा अभियान समूह की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

यह घटना न केवल जीव-प्रेम और सेवा-भाव का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद गौरक्षा समिति के सेवक निरंतर जीवों की रक्षा के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।

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