प्राथमिक वन उपज सहकारी समिति बालोद के अध्यक्ष लोचन सिन्हा के नेतृत्व में पहुंचे अध्यक्ष संघ ने उपाध्यक्ष शर्मा को उनके नवीन दायित्व के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। प्रतिनिधियों ने इस अवसर को सहकारिता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में वनोपज आधारित नीतियों को मिल रही नई दिशा के लिए आभार व्यक्त किया।

बालोद जिले की 17 प्राथमिक वन उपज सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करते हुए अध्यक्षों ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति मानक बोरा दर 5500 रुपये किए जाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इस पहल से न केवल संग्राहकों की आमदनी में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अध्यक्ष संघ ने इसे साय सरकार की संवेदनशील और जनहितकारी नीति का परिणाम बताया, जिसने वनों पर आश्रित परिवारों के जीवन में वास्तविक उजास लाने का कार्य किया है।
भेंट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वनोपज संग्रह, विपणन और व्यवस्थागत चुनौतियों से जुड़ी विभिन्न मांगों को भी उपाध्यक्ष शर्मा के समक्ष रखा। शर्मा ने सभी विषयों को गंभीरता से सुनते हुए उनके समाधान के लिए सकारात्मक और समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर सहकारी समितियों के अध्यक्षों ने बालोद जिले में लघु वनोपज मूल्य संवर्धन इकाई स्थापित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने बताया कि इमली और पलाश जैसी महत्वपूर्ण वनोपजें जिले में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण और विपणन कर संग्राहकों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। अध्यक्षों का मत था कि बड़भूम और आसपास के क्षेत्रों में विपणन एवं मूल्य संवर्धन इकाई की स्थापना से स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और सहकारिता को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार वनोपज संग्राहक परिवारों के समग्र विकास और जनकल्याण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वनोपज संघ के माध्यम से शासन की योजनाएं अंतिम पंक्ति तक पहुंच रही हैं, जिससे सहकारिता का आधार मजबूत हो रहा है। उन्होंने सभी अध्यक्षों से अपने दायित्वों का निर्वहन पारदर्शिता, निष्ठा और समर्पण के साथ करते हुए संग्राहक परिवारों के हित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सौजन्य भेंट के अवसर पर लोचन सिन्हा सहित जिले की विभिन्न प्राथमिक वन उपज सहकारी समितियों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह संवाद न केवल संगठनात्मक सुदृढ़ता का प्रतीक रहा, बल्कि बालोद जिले में वनोपज आधारित विकास को नई दिशा देने वाला भी सिद्ध हुआ।




















