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बालोद जिले में धान खरीदी केंद्रों की क्षमता देने लगा जवाब: 26 दिन में रिकॉर्ड खरीदी, परिवहन की धीमी रफ्तार से संकट गहराया

बालोद। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने के बाद से मात्र 26 दिनों में खरीदी ने रिकॉर्ड आंकड़ा छू लिया है, लेकिन परिवहन की धीमी गति अब पूरे उपार्जन सिस्टम पर बोझ बनती जा रही है। 15 नवंबर से 11 दिसंबर तक जिले के 42 हजार 014 किसानों से 19 लाख 39 हजार 142 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। वहीं मिलर्स द्वारा अब तक केवल 21 हजार 153 क्विंटल धान का उठाव किया गया है। नतीजतन 19 लाख 17 हजार 989 क्विंटल धान अब भी केंद्रों में जमा पड़ा है।

केंद्रों में लगातार हो रही आवक — प्रतिदिन करीब 2 हजार क्विंटल — के कारण अधिकांश समितियों में हालात ‘फुल हाउस’ जैसे हो चुके हैं। यदि आने वाले सप्ताह में उठाव तेजी से नहीं होता है, तो खरीदी एवं तौल प्रक्रिया बाधित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा।

114 केंद्रों में बफर लिमिट पार, धान खुले आसमान के नीचे

जिले के 143 खरीदी केंद्रों में से 114 केंद्र बफर लिमिट पार कर चुके हैं। कई केंद्रों में क्षमता से दोगुना धान रखा गया है, जबकि पर्याप्त चबूतरे और ड्रेनेज व्यवस्था भी इस बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं है। मार्कफेड द्वारा अभी तक बड़े स्तर पर परिवहन शुरू न किए जाने से समिति प्रभारियों की चिंता और बढ़ गई है। जिले में 19 लाख 17 हजार 989 क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जिससे खराब मौसम की स्थिति में बड़े जोखिम की संभावना बनी हुई है।

26 दिनों में रिकॉर्ड खरीदी की पुष्टि

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अनुसार, गुरुवार तक 26 दिनों में जिले के सभी 143 केंद्रों में खरीदी का आंकड़ा 19 लाख 39 हजार 142 क्विंटल पहुंच चुका है। अब तक 42 हजार 014 किसानों ने अपने धान को बेचकर समर्थन मूल्य का लाभ लिया है।

 

इन केंद्रों में शुरू हुआ धान का उठाव, पर गति बेहद धीमी

मिलर्स द्वारा अब तक केवल 11 केंद्रों से 21 हजार 153 क्विंटल धान का उठाव किया गया है। इनमें शामिल केंद्र हैं—
दरबारी नवागांव, कनेरी, तरौद, खप्परवाडा, डोडीलोहारा, तवेरा, पैरी, पाररास, कादुल, कोबा और खुदनी।।परिवहन की रफ्तार मौजूदा दबाव के मुकाबले बेहद कम है, जिससे आने वाले दिनों में धान खरीदी व्यवस्थित रूप से जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

 

किसानों की चिंता बढ़ी, समाधान की उम्मीद

लगातार बढ़ती आवक, सीमित जगह और धीमे उठाव की वजह से उपार्जन केंद्रों पर तनाव बढ़ता जा रहा है। किसान भी आशंकित हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खरीदी पर सीधा असर पड़ेगा। प्रशासन और मार्कफेड के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती—उठाव में तेजी लाना और धान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना—बताई जा रही है।

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