रायपुर। प्रदेश में जमीनों के शासकीय मूल्य (कलेक्टर गाइडलाइन) में हाल ही में की गई भारी वृद्धि के खिलाफ लगातार उठ रही आपत्तियों, विरोध-प्रदर्शनों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों को देखते हुए राज्य स्तरीय केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। रायपुर में आयोजित बैठक के बाद बोर्ड ने गाइडलाइन दरों और मूल्यांकन उपबंधों में व्यापक बदलाव करते हुए कई पुराने प्रावधान पुनः लागू कर दिए हैं। इसके साथ ही नए निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 100 से 800 प्रतिशत तक की वृद्धि के बाद प्रदेशभर में विरोध तेज हो गया था। रायपुर, दुर्ग सहित कई जिलों में रियल एस्टेट सेक्टर, व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों ने आपत्तियां दर्ज कराईं। इसी संदर्भ में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बढ़ोतरी को “जनविरोधी” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी। लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद शासन ने पूरे प्रकरण का पुनरीक्षण करते हुए आज यह बड़ा निर्णय जारी किया है।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों की इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की वर्तमान प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब फिर से पूर्व प्रचलित स्लैब प्रणाली लागू होगी, जिसके तहत नगर निगम क्षेत्र में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक मूल्यांकन स्लैब दर पर होगा। बोर्ड के अनुसार यह बदलाव मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक होगा।
बहुमंजिला भवनों के मूल्यांकन को लेकर भी बड़ा सुधार किया गया है। अब फ्लैट, दुकान और कार्यालयों की कीमत सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर नहीं, बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर तय होगी। यह प्रावधान मध्यप्रदेश शासन काल से लागू था और लंबे समय से इसे बदलने की मांग की जा रही थी। नया प्रावधान वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहित कर शहरी भूमि के बेहतर उपयोग का मार्ग खोलेगा।
कमर्शियल और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स के लिए मूल्यांकन में छूट के नए नियम भी लागू किए गए हैं। अब बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत तथा द्वितीय और उससे ऊपर के तलों पर 20 प्रतिशत की कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे मध्यम वर्ग के लिए आवास और व्यावसायिक स्पेस अपेक्षाकृत सुलभ होगा। वहीं कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में मुख्य मार्ग से 20 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत की कमी के साथ भूखंड दरें निर्धारित की जाएंगी। दूरी का निर्धारण मुख्य मार्ग की ओर से बने फ्रंटेज से किया जाएगा।
इसके साथ ही जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे हाल में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक संशोधित गाइडलाइन प्रस्ताव भेजें। बोर्ड इन प्रस्तावों का विश्लेषण कर आगामी गाइडलाइन पर अंतिम फैसला लेगा।
राज्य सरकार के इन निर्णयों से रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में स्थिरता आएगी, अनावश्यक मूल्य वृद्धि का दबाव कम होगा और किफायती आवास के प्रयासों को गति मिलेगी। विरोध के बीच लिया गया यह निर्णय सरकार के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे जनता और बाज़ार दोनों में भरोसा बहाल होने की संभावना बढ़ी है।




















