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बालोद : सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट फिर विवादों में—नाली निर्माण में तय दूरी की अनदेखी, रसूखदारों के सामने विभाग लाचार; कलेक्टर की फटकार भी बेअसर

 

बालोद। बालोद जिला मुख्यालय के चौक से रेलवे फाटक तक सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। निर्माण कार्य की धीमी गति और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर पहले हुआ विरोध अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मधु चौक से रेलवे फाटक मार्ग पर चल रहे नाली निर्माण में फिर विभागीय लापरवाही सामने आ गई है। तय डिजाइन के अनुसार सड़क की दोनों ओर 9-9 मीटर के दायरे में निर्माण होना था, लेकिन जमीन पर कहीं 6 मीटर तो कहीं 8 मीटर पर नाली तैयार की जा रही है। इससे न केवल डिजाइन बिगड़ रहा है बल्कि स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों व ठेकेदार के कर्मियों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग मनमाने ढंग से नाप-जोख कर रहा है। जहां सामान्य परिवारों के घर सड़क सीमा में आए, वहां बुलडोजर चलाकर सड़क को चौड़ा कर दिया गया, लेकिन जहां प्रभावशाली और रसूखदार लोगों की संपत्तियाँ सड़क के निर्धारित हिस्से में आ रही हैं, वहां विभाग कार्रवाई से पीछे हटता दिख रहा है। इससे पूरे प्रोजेक्ट पर राजनीतिक प्रभाव का साया साफ नजर आ रहा है और सड़क निर्माण अपने शुरुआती चरण में ही मनमानी का शिकार हो रहा है।

गौरतलब है कि पिछले माह कलेक्टर ने सड़क निर्माण में गड़बड़ी और लापरवाही की शिकायतों पर स्वयं स्थल निरीक्षण किया था। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कार्य को गुणवत्ता के साथ और नियत समय में पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने यह भी कहा था कि जनता को असुविधा न हो और निर्माण डिजाइन के अनुसार हो। इसके बावजूद विभाग ने एक बार फिर कलेक्टर के निर्देशों को भुला दिया है और निर्माण में अव्यवस्थित कार्यशैली लौट आई है।

नाली निर्माण की गलत दूरी न सिर्फ प्रोजेक्ट के डिज़ाइन को प्रभावित करेगी बल्कि आगे चलकर सड़क की चौड़ाई भी असमान हो जाएगी। इससे ट्रैफिक संचालन में दिक्कतें आएंगी और भविष्य में दोबारा सुधार कार्य की आवश्यकता पड़ सकती है। इस बीच PWD के अधिकारी इस पूरे विवाद पर मौन साधे हुए हैं, जबकि मैदान पर हालात लगातार अव्यवस्थित होते जा रहे हैं।

स्थानीय लोगो का यह भी मानना है कि यदि विभाग ने जल्द ही तय मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं किया तो करीब 6 करोड़ की यह परियोजना शुरुआत में ही अपनी विश्वसनीयता खो देगी। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में विभाग अपनी गलतियों को सुधारेंगे या विभाग को अपने इन लापरवाही पर कलेक्टर के निरीक्षण और नए निर्देश का इंतजार रहेगा।

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