बालोद। जिले में डिजिटल पहचान के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें सिम विक्रेता द्वारा सिम बेचने के नाम पर ग्राहकों से फर्जी तरीके से अंगूठा लगवाकर 142 सिम कार्ड जारी किए जाने का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन सिमों को जारी करते समय तकनीकी रूप से वास्तविक पहचान का दुरुपयोग किया गया, जिससे बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन गलत तरीके से सक्रिय हो पाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए धमतरी पुलिस अधीक्षक ने बालोद पुलिस को आधिकारिक पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया, जिस पर बालोद पुलिस ने सिम विक्रेता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4) और 42(3)(e) के तहत FIR दर्ज कर ली है। FIR में दर्ज 142 मोबाइल नंबरों की सूची भी मामले की गंभीरता को दर्शाती है, जिनके आधार पर पुलिस तकनीकी विश्लेषण कर रही है।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ इसी तरह के मामलों में पूर्व में न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है। यह इतिहास पुलिस की जांच को और अधिक संवेदनशील दिशा देता है, क्योंकि आरोपी की भूमिका केवल सिम बेचने तक सीमित नहीं लगती, बल्कि तकनीकी पहचान के गलत उपयोग का पैटर्न भी उभरकर सामने आ रहा है। सिम बेचने के नाम पर लोगों से अंगूठा लगवाकर उसे डिजिटल प्रमाणीकरण की तरह दिखाना और फिर उसकी आड़ में कई-कई सिम जारी करना न केवल टेलीकॉम नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में बड़े साइबर अपराधों का आधार बन सकता है।
साइबर सेल प्रभारी धरम भूआर्य और टीम ने उपलब्ध तकनीकी डाटा की पड़ताल शुरू कर दी है। FIR में दर्ज सभी मोबाइल नंबरों की लोकेशन, उपयोग के पैटर्न, और सक्रियता की समय-सीमा का मिलान किया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि इन सिमों का उपयोग कहीं किसी संगठित साइबर फ्रॉड के लिए तो नहीं किया गया। वर्तमान डिजिटल वातावरण में फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान हथियार बन चुके हैं—फर्जी कॉल सेंटर, कर्ज ठगी, OTP फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल पहचान चुराने जैसे अपराध इन्हीं के सहारे अंजाम दिए जाते हैं। इसलिए बालोद पुलिस इस पूरे मामले को गंभीर साइबर सुरक्षा दृष्टिकोण से देख रही है।
थाना प्रभारी निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस टीम FIR दर्ज होने के बाद से ही सक्रिय है। POS मशीन और मोबाइल नंबरों के तकनीकी डेटा को सुरक्षित किया गया है तथा सिम जारी करने की प्रक्रिया में किस प्रकार की अनियमितता अपनाई गई, इसका सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबरों की इतनी बड़ी श्रृंखला किसी साधारण गलती का संकेत नहीं देती, बल्कि यह संभव है कि यह गतिविधि किसी संगठित आर्थिक लाभ या साइबर संचालन का हिस्सा रही हो।
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच इस तरह की घटनाएँ न केवल नागरिकों को सतर्क करने का काम करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि डिजिटल पहचान की सुरक्षा कितनी आवश्यक हो गई है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बिना आवश्यकता किसी भी दस्तावेज या बायोमेट्रिक को साझा न करें और सिम सक्रियता के समय पूरी प्रक्रिया को स्वयं देखना अनिवार्य है। पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और अधिकारियों का मानना है कि इन 142 फर्जी सिम की कड़ी से जल्द ही बड़ा नेटवर्क भी सामने आ सकता है।
जांच के प्राथमिक चरण में ही स्पष्ट हो चुका है कि यह मामला साधारण अनियमितता का नहीं, बल्कि डिजिटल पहचान के दुरुपयोग की संगठित पद्धति का संकेत है। पुलिस ने कहा है कि जैसे-जैसे तकनीकी रिपोर्ट सामने आएगी, मामला और स्पष्ट होगा और संभव है कि आने वाले दिनों में बड़े खुलासे सामने आएं।




















