दो महीने से न्याय की लड़ाई, एक भी कार्रवाई नहीं
परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के एक युवक के खिलाफ उन्होंने दो महीने पहले ही लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में छेड़छाड़, पीछा करने और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप दर्ज थे।
परिवार का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने न कोई जांच आगे बढ़ाई और न ही आरोपी पर कार्रवाई की। इससे परिवार में भय इतना बढ़ गया कि नाबालिग बेटी को पढ़ाई के लिए भेजने तक पिता को साथ जाना पड़ रहा था। घर पर उसे अकेला छोड़ना भी असंभव हो गया था।

विधायक ने भी उठाई थी आवाज, फिर भी नहीं बदली स्थिति
करीब सप्ताह भर पहले क्षेत्रीय विधायक संगीता सिन्हा भी पीड़िता की मां के साथ पुलिस अधीक्षक से मिली थीं और तत्काल कार्रवाई की मांग रखी थी। बावजूद इसके, शिकायत में कोई प्रगति न होने से पीड़ित परिवार की चिंता और बढ़ गई। परिजनों का कहना है कि इसी लापरवाही और मानसिक तनाव ने रामनारायण को आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
थाने के बाहर जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों का जमावड़ा
घटना की खबर फैलते ही सिटी कोतवाली के बाहर भीड़ उमड़ पड़ी। विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक भैया राम सिन्हा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, अंचल प्रकाश साहू, कमलेश श्रीवास्तव, धीरज उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
परिजन आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे और करीब चार घंटे तक थाने के सामने तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

6 दिन में गिरफ्तारी का आश्वासन, तब रुका विरोध
लंबी बातचीत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए छह दिन का समय मांगा। आश्वासन मिलने पर परिजनों ने आंदोलन स्थगित किया।
SDOP बोनीफीस एक्का का कहना है कि आरोपी को छह दिन से पहले ही पकड़ने की कोशिश की जा रही है और मामले में अब तेजी से कार्रवाई होगी।
लापरवाही पर सवाल, न्याय की मांग तेज
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह त्रासदी नहीं घटती। परिवार और स्थानीय लोग अब नाबालिग लड़की को न्याय दिलाने और पुलिस की लापरवाही की जांच की मांग कर रहे हैं।




















