व्यापारियों ने बताया कि जिले में करीब 750 फुटकर–थोक व्यापारी सक्रिय हैं, जिनकी खरीद क्षमता 20 क्विंटल और धान संभाल क्षमता लगभग 10 क्विंटल है। यह व्यापार न सिर्फ जिले की आर्थिक धड़कन है बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है।
“हम धान को व्यापार नहीं, त्योहार की तरह मानते हैं”—व्यापारी
व्यापारी यादराम साहू ने कहा कि धान उनके लिए केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष प्रतीक्षा के बाद आने वाला त्योहार है।
उन्होंने बताया इस व्यवसाय से 500 से अधिक व्यापारी जुड़े हैं।जो मिलकर 5,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देते हैं,जबकि 20,000 से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यापार पर निर्भर हैं
छापेमारी से व्यापार ठप, किसानों पर भी असर
व्यापारी जगत यादव ने कहा कि हाल की सख्त कार्रवाइयों ने व्यापार को संकट में डाल दिया है। उनके अनुसार यह कृषि से जुड़ा व्यवसाय है, इसलिए इतनी कड़ी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी।वर्षों से ईमानदारी से काम कर रहे व्यापारियों को पहली बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है

व्यापारियों ने यह भी बताया कि जिले में कई किसान बड़े भू-स्वामियों की जमीन पर खेती करते हैं। सरकार के पास इनके लिए अलग खरीद व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण ऐसे किसान भी अपने धान के निपटान के लिए फुटकर व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। यदि व्यापार प्रभावित होता है, तो इन किसानों समेत हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
राहत की मांग
फुटकर व्यापारी संघ ने प्रशासन से अपील की है कि कठोर कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए धान व्यापार को बिना बाधा जारी रखने के लिए राहत दी जाए।प्रदर्शन में जिले भर से आए सैकड़ों व्यापारियों ने हिस्सा लिया।




















