
110 एकड़ में फैला अत्याधुनिक वनोपज प्रसंस्करण परिसर
इस निरीक्षण के दौरान वनमंडलाधिकारी दुर्ग दीपेश कपिल (IFS), दुर्ग वृत डिप्टी एमडी, बालोद डिप्टी एमडी और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह विशाल प्रसंस्करण इकाई 110 एकड़ क्षेत्र में फैली है, जहाँ विभिन्न वनोपजों को मूल्यवर्धन कर बाजार योग्य बनाया जा रहा है।
आंवला, बेल, जामुन से तैयार हो रहे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद
उपाध्यक्ष शर्मा ने इकाई में आंवला, बेल और जामुन से तैयार हो रहे जूस, कैंडी, लच्छा, मुरब्बा और हर्बल उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया देखी। उन्होंने गोदामों में भंडारित वनोपज, मिलेट्स फसल, पैकिंग और प्रसंस्करण पश्चात वितरण व्यवस्था की भी विस्तृत जानकारी ली।

“छत्तीसगढ़ का वनोपज वैश्विक स्तर पर पहचान बनाए”—यज्ञदत्त शर्मा
निरीक्षण के दौरान उपाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि— “छत्तीसगढ़ के वनोपज विश्व बाजार तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से यह केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है।”
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 75 प्रकार के वनोपज का संग्रहण किया जाता है और इस प्रणाली से 13 लाख 40 हजार वनवासियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
उपाध्यक्ष शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी व्यवस्था विष्णुदेव साय सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का प्रयास है कि संग्राहकों को उचित मूल्य मिले, ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का स्थायी स्रोत तैयार हो, और महिलाओं व स्थानीय समुदायों को रोजगार के अवसर बढ़ें।
उन्होंने कहा कि वनोपजों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण ने न सिर्फ उत्पादों की मूल्यवृद्धि बढ़ाई है, बल्कि इससे प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई मजबूती मिल रही है।




















