जनजातीय गौरव वर्ष 2025 के तहत आज देशभर में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भव्य आयोजन हुए। इन समारोहों ने देशभक्ति, एकता और भारत की जनजातीय विरासत के गौरव को जीवंत कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अवसर पर जनजातीय सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गर्व को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना के साथ देश के कोने-कोने में विविध आयोजन हुए।
ओडिशा: प्रश्नोत्तरी, चित्रकला और बिरसा मुंडा गैलरी
ओडिशा में छात्रों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक प्रदर्शन और संग्रहालय भ्रमण का आयोजन हुआ। राज्य जनजातीय संग्रहालय में भगवान बिरसा मुंडा गैलरी और जनजातीय कलाकारों की चित्रकला प्रदर्शनी ने लोगों को उनकी विरासत से जोड़ दिया।


आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: वंदे मातरम् का सामूहिक गान
आंध्र प्रदेश में टीआरआई ने प्रतिभागियों के बीच राष्ट्रीय गौरव का भाव जगाते हुए वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कराया। तेलंगाना के नेहरू शताब्दी जनजातीय संग्रहालय में भी स्कूली छात्रों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक गायन में हिस्सा लिया।


जम्मू-कश्मीर में, जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा के अंतर्गत, करगिल के सरकारी हाई स्कूल काकसर में एक एथनिक फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जनजातीय अनुसंधान संस्थान, लद्दाख विश्वविद्यालय (टीआरआई-यूओएल) द्वारा समर्थित और जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित, इस कार्यक्रम में पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से क्षेत्र की जीवंत जनजातीय विरासत का उत्सव मनाया गया। इस फेस्टिवल में मुख्य अतिथि के रूप में करगिल के मुख्य शिक्षा अधिकारी और विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर उपस्थित थे, जो एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना को दर्शाता है।


भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली झारखंड में, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की बस्ती में जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को एकता और सम्मान की भावना के साथ एकजुट किया तथा पारंपरिक कला, संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों पर प्रकाश डाला जो भगवान बिरसा मुंडा की स्थायी विरासत और झारखंड की जनजातीय विरासत के गौरव को दर्शाती हैं। इसके अलावा, जनजातीय अनुसंधान संस्थान ने छात्रों और जनजातीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आयोजित किया।


बिहार में, जनजातीय गौरव वर्ष 2025 की थीम पर आयोजित निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं में छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें भारत की जनजातीय विरासत के गौरव, दृढ़ता और एकता के मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। शिक्षा और सशक्तिकरण के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप, जनजातीय छात्रों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें आवश्यक जीवन कौशल से लैस करने के लिए ईएमआरएस संस्थानों में वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं।


गुजरात में आयोजित समारोहों में, माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल द्वारा अंबाजी से जनजाति गौरव यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करना मुख्य आकर्षण रहा। वलसाड के उमरगाम से शुरू हुई यह यात्रा 7 से 13 नवंबर 2025 तक एकतानगर (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) की ओर बढ़ रही है। एक विशाल काफिले और व्यापक सामुदायिक भागीदारी के साथ, इस यात्रा का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारत के इतिहास में जनजातीय नायकों के योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना और उनकी अदम्य भावना व विरासत का सम्मान करना है।


तमिलनाडु में, श्री भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव दिवस समारोह के अंतर्गत, जुगा पहल के तहत एएचएस सुड्डापल्ली में एक ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें जनजातीय छात्रों को रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

सिक्किम के रेशीथांग स्थित खेल गांव में जनजातीय छात्र खेलकूद प्रतियोगिता एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जिसमें जनजातीय युवाओं में शारीरिक फिटनेस, खेल भावना व स्वास्थ्य जागरूकता के महत्व पर ज़ोर दिया गया।


इस बीच, नागालैंड में, ईएमआरएस स्कूलों ने कहानी सुनाने और पारंपरिक पोशाक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया, जिसमें राज्य के विविध जनजातीय समुदायों की समृद्ध मौखिक परंपराओं, लोक कथाओं और जीवंत परिधानों का प्रदर्शन किया गया। इन पहलों ने छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने, अपनी संस्कृति का उत्सव मनाने और अपने पूर्वजों की विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।


जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा (1 से 15 नवंबर) के ये आयोजन न सिर्फ जनजातीय पहचान और संस्कृति का उत्सव हैं, बल्कि यह भारत की समृद्ध परंपराओं और समावेशी विकास के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी हैं।




















