
राजेंद्र देशमुख एक हाथ से दिव्यांग हैं, लेकिन उनके जज्बे और मेहनत ने यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक सीमाएं मायने नहीं रखतीं। वे बल्लेबाजी और गेंदबाजी—दोनों में माहिर हैं। श्रीलंका में होने वाली यह पांच मैचों की टी-20 श्रृंखला 13 से 17 नवंबर तक चलेगी। टीम 18 नवंबर को भारत लौटेगी।
राजेंद्र ने बताया कि वे 11 नवंबर को दुर्ग से चेन्नई के लिए रवाना होंगे। 12 नवंबर को चेन्नई कैंप में शामिल होकर पूरी टीम के साथ 13 नवंबर को श्रीलंका के लिए उड़ान भरेंगे, जहां उसी दिन दोपहर 3 बजे पहला मैच खेला जाएगा।

उनके चयन की खबर से गांव बूढ़ानपुर में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांव के लोगों ने मिठाई बांटी और राजेंद्र के सम्मान में जश्न मनाया। परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने राजेंद्र देशमुख को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और उपलब्धि जिले के अन्य दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। कलेक्टर के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक ने उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की, ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

उप संचालक ने कहा कि, “राजेंद्र का चयन न केवल जिले के लिए सम्मान की बात है बल्कि इससे अन्य दिव्यांग युवाओं का मनोबल भी बढ़ेगा।”

राजेंद्र ने कहा कि यह अवसर उनके लिए सपना सच होने जैसा है। उन्होंने कहा—“मैं चाहता हूं कि मेरे जैसे दिव्यांग खिलाड़ी कभी खुद को कमजोर न समझें। अगर हौसला बुलंद हो, तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है।”
राजेंद्र देशमुख अब न केवल बालोद बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। एक हाथ से चौके-छक्के लगाने वाले इस खिलाड़ी की कहानी हौसले, संघर्ष और सफलता की मिसाल है।




















