बालोद। जगद्गुरुत्तम स्वामी श्री कृपालु जी महाराज के मुख्य प्रचारक एवं ब्रज गोपिका सेवा मिशन (BGSM) के सह-संस्थापक स्वामी युगल शरण जी महाराज द्वारा 20 दिवसीय विलक्षण दार्शनिक प्रवचन श्रृंखला का आयोजन बालोद शहर के सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान, घड़ी चौक में किया जा रहा है। यह श्रृंखला 7 नवंबर से 26 नवंबर तक प्रतिदिन शाम 6:00 से रात 8:30 बजे तक आयोजित होगी।
वृंदावन स्थित आश्रम से आए मोहन दास, सुनील शर्मा, गदाधर जी एवं अन्य सेवादारों ने बताया कि इस श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के वास्तविक मर्म को जन-जन तक पहुंचाना है। शहर के प्रत्येक घर में पर्चे वितरित कर श्रद्धालुओं को इस आध्यात्मिक महोत्सव में आमंत्रित किया जा रहा है।
वैज्ञानिक से संन्यासी बनने की अद्भुत यात्रा
स्वामी युगल शरण जी का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि आत्मा की पुकार व्यक्ति को नए मार्ग पर ले जाती है।
ओडिशा में 1963 में जन्मे स्वामी जी ने प्रारंभिक जीवन में वैष्णव परंपरा का पालन करते हुए शिक्षा प्राप्त की। ज्ञान की खोज उन्हें विज्ञान की दुनिया में ले गई, जहां उन्होंने भारत सरकार के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI) में लगभग 10 वर्षों तक वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में सेवा दी।
लेकिन उनके भीतर का जिज्ञासु मन जीवन के गूढ़ रहस्यों की खोज में था। यही जिज्ञासा उन्हें आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले गई — और यही से प्रारंभ हुई विज्ञान से अध्यात्म की ओर उनकी अद्भुत यात्रा।

BGSM की स्थापना और अध्यात्म में नया दृष्टिकोण
रासेश्वरी देवी जी के माध्यम से स्वामी जी की भेंट जब जगद्गुरुत्तम स्वामी श्री कृपालु जी महाराज से हुई, तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। दोनों की साझा आध्यात्मिक दृष्टि ने ब्रज गोपिका सेवा मिशन (BGSM) की स्थापना की। स्वामी जी ने अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आध्यात्मिकता के साथ जोड़कर एक अनोखा संतुलन प्रस्तुत किया, जिससे BGSM की शिक्षाओं में तर्क और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
शोध और अंतरराष्ट्रीय पहचान
भक्ति संगीत के पौधों पर प्रभाव को लेकर स्वामी जी द्वारा किए गए अनूठे शोध कार्य को नवंबर 2024 में सम्बलपुर विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
उनका यह शोध कार्य अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी द्वारा भी मान्यता प्राप्त कर चुका है, जो विज्ञान और अध्यात्म के मेल का एक जीवंत उदाहरण है।
ज्ञान, भक्ति और जीवन का संगम
स्वामी युगल शरण जी के प्रवचन न केवल दार्शनिक गहराई लिए हुए होते हैं, बल्कि वे व्यवहारिक जीवन में आध्यात्मिक सिद्धांतों को अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं।
उनकी शिक्षाएँ लोगों को यह समझने का अवसर देती हैं कि सच्ची भक्ति केवल उपासना नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
आमंत्रण सभी सनातन प्रेमियों से
आयोजक समिति ने सभी बालोद वासियों एवं आसपास के श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस आध्यात्मिक ज्ञानयज्ञ में सम्मिलित होकर स्वामी जी के अमृतमय वचनों का लाभ लें।
यह श्रृंखला केवल प्रवचन नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन की दिशा में एक आत्मिक अनुभव होगी।




















