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धान खरीदी से पहले हड़ताल: सहकारी समिति कर्मचारियों की नाराजगी से सरकार की बढ़ सकती है मुश्किलें

 

बालोद। धान खरीदी की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ सरकार के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर दुर्ग संभाग स्तर पर हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल में सहायक प्रबंधक, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, विक्रेता और चौकीदार सहित सभी वर्गों के कर्मचारी शामिल हैं।

हड़ताली कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन कर शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित मांगों को लेकर बार-बार शासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर ठोस पहल नहीं की गई है।

संघ के जिलाध्यक्ष गजेन्द्र देशमुख ने कहा कि हर साल धान खरीदी से पहले कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी अनदेखी करती आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

कर्मचारी संघ का आरोप है कि खरीदी सीजन के दौरान अगर धान में किसी तरह की कमी पाई जाती है, तो जिम्मेदारी समिति कर्मचारियों पर डाल दी जाती है, जबकि धान का उठाव समय पर नहीं होने के कारण कई बार वे असहाय स्थिति में रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें कम वेतन दिया जाता है।

संघ ने सरकार से सीधी भर्ती की व्यवस्था लागू करने और आउटसोर्सिंग बंद करने की भी मांग की है।
हड़ताल के चलते प्रदेशभर की कई सहकारी समितियों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है, जिसका असर धान खरीदी की शुरुआती प्रक्रिया पर सीधा पड़ सकता है।

कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि शासन ने जल्द उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो हड़ताल को अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा।

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