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धान खरीदी से पहले बड़ा विवाद — सहकारी समिति कर्मचारियों ने किया बहिष्कार का ऐलान, 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

बालोद। प्रदेश में इस बार धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होने जा रही है, लेकिन उससे पहले ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ ने आगामी खरीदी सीजन का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को महासंघ ने नया बस स्टैंड बालोद में एक दिवसीय धरना देकर शहर में रैली निकाली और मुख्यमंत्री, खाद्य मंत्री व वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।

महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी चार सूत्रीय मांगों पर सरकार ने तत्काल निर्णय नहीं लिया तो 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। आंदोलन के चलते आगामी धान खरीदी प्रभावित हो सकती है।

 आंदोलन की रूपरेखा तय — 24 अक्टूबर से चरणबद्ध प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ रायपुर एवं समर्थन मूल्य धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है।

24 अक्टूबर: जिला मुख्यालयों में रैली और ज्ञापन।

28 अक्टूबर: संभागीय स्तर पर “महाहुंकार” रैली।

3 से 11 नवंबर: संभागीय स्तर पर क्रमिक आंदोलन।

12 नवंबर: चार सूत्रीय मांगों की पूर्ति नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल।

महासंघ ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगें नहीं मानीं तो इस बार धान खरीदी पूरी तरह ठप रहेगी।


 चार सूत्रीय मांगों पर नहीं हुई कार्रवाई

महासंघ के जिला अध्यक्ष गजेन्द्र देशमुख ने बताया कि कर्मचारियों की चार सूत्रीय मांगें खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि “पिछले वर्ष भी धान खरीदी से पहले आंदोलन हुआ था। तब शासन ने मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। यही वजह है कि कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है।”

 “हमारी मांगें भविष्य से जुड़ी हैं” — कर्मचारी नेता

संघ के नेताओं ने कहा कि प्रदेश के करीब 15,000 सहकारी समिति कर्मचारी और 27,000 से अधिक उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर इस आंदोलन से जुड़े हैं।
उनका कहना है कि “हमारी मांगें पूरी तरह जायज हैं और हमारे भविष्य से जुड़ी हैं। यदि सरकार समय पर समाधान नहीं करती, तो धान खरीदी प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा और इसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।”

 किसानों पर पड़ेगा सीधा असर

धान खरीदी छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए आर्थिक आधार है। ऐसे में कर्मचारियों के आंदोलन का असर किसानों के भविष्य पर सीधा पड़ सकता है।
कर्मचारियों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे धान खरीदी का बहिष्कार करेंगे। अब नजर इस पर टिकी है कि शासन कर्मचारियों को मनाने की पहल करता है या नहीं — क्योंकि आंदोलन तेज हुआ तो इस बार खरीदी केंद्रों पर ताले लग सकते हैं।

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