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इस दिवाली सचमुच खुशियों वाली दिवाली : एनएसएस का अनोखा अभियान

बालोद। दिवाली खुशियाँ बाँटने का त्योहार है, लेकिन इस बार बालोद जिले के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने इस कहावत को साकार कर दिखाया। पिछले पाँच वर्षों से निरंतर जारी इस अनोखी परंपरा के तहत स्वयंसेवक हर वर्ष ज़रूरतमंदों के बीच खुशियाँ बाँटते हैं — और इस बार भी उन्होंने बालोद वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ दिवाली मनाकर सबका दिल जीत लिया।

वरिष्ठ स्वयंसेविका कल्पना बंबोड़े के नेतृत्व में हुए इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने सामुदायिक अन्न व आर्थिक सहयोग जुटाकर जरूरतमंदों तक पहुँचाया। वृद्धाश्रम को दीपों, रंगोली और फूलों के तोरणों से सजाया गया। संध्या आरती में सभी बुजुर्गों ने हिस्सा लिया, जिसके बाद उन्हें नए कपड़े और उपहार भेंट किए गए। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक ‘सुआ नृत्य’ से हुआ, जिसमें बुजुर्गों और स्वयंसेवकों दोनों के चेहरे पर सच्ची मुस्कान झलक रही थी।

हमारा छोटा सा प्रयास – खुशियाँ बाँटने का” : कल्पना बंबोड़े

स्वयंसेविका कल्पना बंबोड़े ने बताया कि एनएसएस के स्वयंसेवक हर साल इस अभियान के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों तक खुशी पहुँचाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा, “कई लोग मदद करना चाहते हैं पर समय के अभाव में नहीं कर पाते। हम उनके सहयोग और समाज के जरूरतमंदों के बीच एक सेतु की तरह कार्य करते हैं।”

इस वर्ष भी जिले के विभिन्न महाविद्यालयों के एनएसएस यूनिट ने इस अभियान में भाग लिया —शासकीय दुर्वासा निषाद महाविद्यालय, अर्जुंदा का नेतृत्व स्वयंसेवक प्रणव तिवारी, गुरुर महाविद्यालय का नेतृत्व खिलेश्वर साहू व दीप्ति पटेल, एकलव्य महाविद्यालय, डौंडी लोहारा में दीपेश साहू ने जिम्मेदारी निभाई। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वयंसेवक एवं सामाजिक कार्यकर्ता कौशल गजेन्द्र, मनीषा राणा, मयंक साहू, सागर, अनिल कुमार, कुशल और गौतम भी उपस्थित रहे।

खुशियों की झिलमिल रोशनी से जगमगाया वृद्धाश्रम

दीपों की रोशनी और बुजुर्गों की मुस्कान से पूरा वृद्धाश्रम जगमगा उठा। वहाँ का माहौल ऐसा था मानो सचमुच दिवाली अपने सच्चे अर्थों में “खुशियों बाँटने वाली दिवाली” बन गई हो।

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