यह सम्मान 17 अक्टूबर को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा को प्रदान किया गया। इस सम्मान से बालोद जिले की टीम ने जनजातीय विकास में नई पहचान बनाई है।

186 जनजातीय गांवों में बदलाव की मिसाल
17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चले ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के दौरान बालोद जिले के 186 जनजातीय बहुल गांवों में डोर-टू-डोर संपर्क कर शासन की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाया गया।
इन गांवों में ट्राईबल विलेज एक्शन प्लान और ट्राईबल विलेज विजन 2030 तैयार किया गया, जिससे जनजातीय समुदायों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने में सफलता मिली।

टीम बालोद का सम्मान
इस उपलब्धि के बाद बुधवार को संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विजय सिंह कंवर, एसडीएम सुरेश साहू, जनपद पंचायत डौंडी के सीईओ डीडी मंडले और अभियान में सक्रिय रहे सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का सम्मान किया।
कलेक्टर ने कहा — “यह उपलब्धि पूरे बालोद जिले की टीम भावना और समर्पण का नतीजा है। विजय सिंह कंवर और उनकी टीम ने जिस लगन से काम किया, वह पूरे राज्य के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।”

आदि कर्मयोगी अभियान बना प्रेरणा का प्रतीक
बालोद जिले के इस मॉडल ने न सिर्फ योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाया बल्कि जनजातीय समाज में नेतृत्व और आत्मविश्वास की नई लहर जगाई।
यह साबित करता है कि जब प्रशासन, जनता और योजनाएं एक साथ आगे बढ़ें — तो हर बदलाव मुमकिन है।




















