लेकिन लक्ष्मी पूजा के दिन इस पूरी योजना की पोल खुल गई। शहर के जयस्तंभ चौक से शीतला मंदिर मार्ग तक यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई दिखी। खासतौर पर दूध गंगा परिसर के पास स्थिति विकराल रही, जहां संचालक ने सड़क किनारे तक पंडाल फैलाकर काउंटर बढ़ा लिए। इससे सड़क संकरी हो गई और आने-जाने वाले वाहनों को रेंग-रेंग कर निकलना पड़ा।

वाहनों की पार्किंग व्यवस्था के लिए आसपास पर्याप्त जगह — जैसे संजारी क्लब, मिलेट कैफे और आपस वाहन पार्किंग — उपलब्ध होने के बावजूद किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई। दूध गंगा संचालकों द्वारा की गई इस मनमानी पर न तो यातायात विभाग ने ध्यान दिया, न नगर प्रशासन ने कोई तत्काल कदम उठाया।
परिणामस्वरूप दीपावली की खरीददारी करने निकले लोगों को जाम और अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। बुजुर्गों और महिलाओं को पैदल निकलने तक में मुश्किलें आईं। स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब पहले से ट्रैफिक प्लान तैयार था, तो फिर मौके पर निगरानी और पालन सुनिश्चित करने में इतनी लापरवाही क्यों बरती गई?

स्थानीयों का आरोप “हर साल यही होता है। नियम कागजों में सिमट जाते हैं। दूध गंगा के सामने सड़क घेर ली जाती है, पुलिस वाले खुद देखकर भी अनदेखा कर देते हैं।” — स्थानीय व्यक्ति ने नाराजगी जताई।
यातायात विभाग और जिम्मेदार संस्थानों की अनदेखी के कारण दीपावली की खुशियों के बीच अव्यवस्था का अंधेरा फैल गया। अब जरूरत है कि प्रशासन ऐसे असहयोगी कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आने वाले पर्वों में आम लोगों को राहत मिल सके।




















