
प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। इस संबंध में पहले भी बीएसपी प्रबंधन और ठेकेदारों द्वारा उनकी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया गया था, लेकिन उस पर आज तक कोई अमल नहीं हुआ। बार-बार की अनदेखी से आक्रोशित होकर कुमरकट्टा, कोपेडेरा और नलकासा सहित अन्य प्रभावित गांवों के किसानों और बेरोजगारों ने आंदोलन को तेज करने का फैसला किया।
प्रशासन को पहले ही दे दी थी सूचना
आंदोलनकारियों ने इस चक्का जाम की सूचना 10 अक्टूबर 2025 को ही एक ज्ञापन के माध्यम से अनुविभागीय दंडाधिकारी, दल्लीराजहरा थाना प्रभारी और यातायात प्रभारी को दे दी थी। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 16 अक्टूबर से वे बीएसपी और ठेकेदार के सभी कार्यों को अनिश्चितकाल के लिए बाधित करने को बाध्य होंगे।

कामकाज पूरी तरह प्रभावित
आज सुबह से शुरू हुए इस चक्का जाम के कारण क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। खदानों और प्लांट की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक बीएसपी प्रबंधन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने इस पूरी स्थिति की जिम्मेदारी बीएसपी प्रबंधन पर डाली है। फिलहाल, मौके पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।




















