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प्रदेश रूचि

मुख्यमंत्री ने दी वैद्यों को ‘कुटनी मशीन’ की सौगात, बालोद के वैद्य पुरुषोत्तम राजपूत हुए सम्मानित

बालोद। राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय पारंपरिक वैद्य महासम्मेलन में प्रदेशभर से आए लगभग 1500 पारंपरिक वैद्यों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक वैद्यों को सशक्त बनाने के लिए जड़ी-बूटी कुटने की मशीनें प्रदान कीं।

कार्यक्रम में बालोद जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य एवं पंचगव्य कैंसर विशेषज्ञ पुरुषोत्तम सिंह राजपूत को मुख्यमंत्री के हाथों यह मशीन प्रदान की गई। यह बालोद जिले के लिए गौरव का क्षण रहा।

महासम्मेलन की अध्यक्षता कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने की, जबकि वन मंत्री केदार कश्यप, वनौषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष रायपुर विकास मरकाम, कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा एवं पद्म हेमचंद मांझी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति हमारी संस्कृति और जनजीवन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने वैद्यों के प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष कार्यशालाओं के आयोजन की घोषणा भी की।

कार्यक्रम के दौरान बोर्ड अध्यक्ष मरकाम ने वैद्यों के संगठन, पंजीयन और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने 17 जिलों के चयनित वैद्यों को औषधि निर्माण कार्य में सहूलियत हेतु कुटनी मशीनें प्रदान कीं।

पुरुषोत्तम सिंह राजपूत, जिन्हें पूर्व में भी 2017 में वन मड़ई के दौरान छत्तीसगढ़ शासन द्वारा “पारंपरिक हर्बल चिकित्सक सम्मान” से नवाजा जा चुका है, ने इस बार भी अपनी विद्वत्ता और सेवा भावना से राज्य स्तर पर बालोद जिले का नाम रोशन किया।

राजपूत ने सम्मेलन में आयुर्वेद की महिमा, गोमाता से प्राप्त पंचगव्य चिकित्सा तथा मानव जीवन में वनौषधियों के महत्व पर सारगर्भित विचार रखे। उनके उद्बोधन को उपस्थित वैद्यों और अतिथियों ने अत्यंत प्रेरणादायक बताया।

इस उपलब्धि पर गौसेवा आयोग के जिला अध्यक्ष योगेश्वर यादव, विनोद साहू, छगन यादव, मुकेश आरदा, पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन छत्तीसगढ़, योग वेदांत सेवा समिति तथा गोपाल गौ रक्षा अनुसंधान गोशाला डौंडी सहित आञ्जनेय नंदन सर्वसिद्ध हनुमान मंदिर सेवा समिति बेलमांड के पदाधिकारियों ने राजपूत को बधाई दी।

राज्य स्तरीय इस मंच पर एक बार फिर बालोद के वैद्य पुरुषोत्तम सिंह राजपूत ने सिद्ध कर दिया कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक सोच का संगम ही समाज के वास्तविक स्वास्थ्य कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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