प्रदेशरुचि की पड़ताल में पहले ही खुल चुकी थी खामियां
कुछ दिन पहले प्रदेशरुचि ने अपनी पड़ताल में खुलासा किया था कि डिवाइडर निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा सड़क खुदाई से निकले मुरम और गिट्टीयुक्त मलबे को ही डिवाइडर में भर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया था कि निर्माण प्राक्कलन (Estimate) में इस तरह के मलबे के पुनः उपयोग का कोई प्रावधान नहीं होता। ऐसे कार्यों में उपजाऊ काली मिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि पौधारोपण और सौंदर्यीकरण कार्य संभव हो सके।

लेकिन ठेकेदार ने इन मानकों को दरकिनार कर सड़क का मलबा ही डिवाइडर में भरना शुरू कर दिया। इसके बाद से नागरिकों में असंतोष बढ़ा और अब यह मामला सार्वजनिक विरोध तक पहुंच गया है।
बिना योजना और निगरानी के हो रहा निर्माण
हिंद सेना ने अपने 14 अक्टूबर को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि यह पूरा कार्य बिना किसी ठोस योजना और तकनीकी निगरानी के किया जा रहा है। सड़क किनारों की खुदाई से न केवल मार्ग की समतलता खत्म हो गई है, बल्कि जगह-जगह मिट्टी के ढेर और गड्ढों ने यातायात को खतरनाक बना दिया है। हल्की बारिश में मार्ग कीचड़युक्त हो जाता है, जिससे दोपहिया वाहन फिसलने और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।
नागरिक परेशान, सुरक्षा से खिलवाड़
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो बैरिकेडिंग की गई है, न ही चेतावनी संकेत बोर्ड लगाए गए हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग रोजाना इसी मार्ग से गुजरते हैं, जहां कीचड़ और मलबे के कारण कई बार वाहन फिसलने की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि ठेकेदार मनमर्जी से काम कर रहा है और विभागीय अधिकारी मौन हैं।
विभागीय अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल
प्रदेशरुचि टीम ने पहले भी इस मामले में लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता दिनेश माहेश्वरी और कार्यपालन अभियंता पूर्णिमा चंद्रा से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों अधिकारियों ने न तो कॉल रिसिव किया और न ही बाद में कोई प्रतिक्रिया दी। इस चुप्पी को लेकर अब नागरिकों और संगठनों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अधिकारी इस पूरे मामले में खामोश क्यों हैं।
हिंद सेना ने ज्ञापन में प्रशासन से चार ठोस मांगें रखी हैं जिसमें डिवाइडर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तत्काल जांच की जाए। सड़क पर डाली गई मिट्टी को हटाकर मार्ग को फिर से सुगम और समतल बनाया जाए।निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

उम्मीदें और जिम्मेदारी
हिंद सेना ने विश्वास जताया है कि कलेक्टर इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित जांच के निर्देश देंगे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की जाती है, तो भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर अंकुश लग सकेगा।
प्रदेशरुचि लगातार ने इस सड़क निर्माण में हो रही तकनीकी अनियमितताओं को सबसे पहले उजागर किया था। अब जब नागरिक संगठन भी खुलकर आवाज़ उठा रहे हैं, यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जनता के बीच विश्वास बहाल करे। एक विकसित होते नगर की पहचान उसकी सड़कों और पारदर्शिता से होती है — और यह जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की है।




















