उन्होंने कहा कि मनुष्य को ध्रुव की तरह स्थिर रहकर ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। सच्ची भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना नहीं, बल्कि सांसारिक कार्यों के बीच भी मन को ईश्वर में स्थिर रखना है। पंडित शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह और शाम कम से कम बीस मिनट ईश्वर के ध्यान में लगाना चाहिए, क्योंकि वही हमें इस जीवन से जोड़ने वाले हैं।

कथा के प्रथम दिवस मंगलवार को गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कथा स्थल पर पहुंची।
इस धार्मिक आयोजन में यजमान भूपेंद्र दुबे, पूनम दुबे, धर्मेंद्र दुबे, अर्चना दुबे, अटल दुबे, स्वेता दुबे सहित नगर के बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष शामिल होकर कथा श्रवण कर रहे हैं।




















