कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था — आईटी अधिनियम की धारा 69ए और 79(3)(बी) के तहत जारी किए जाने वाले नोटिसों की प्रक्रिया को स्पष्ट, मानकीकृत और कानूनी रूप से मज़बूत बनाना, ताकि सोशल मीडिया और डिजिटल मध्यस्थों के माध्यम से फैलने वाली गलत या गैरकानूनी सूचनाओं पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
धारा 69ए और 79(3)(बी): कब और कैसे होती है कार्रवाई
आईटी अधिनियम की धारा 69ए सरकार को उन ऑनलाइन सूचनाओं को ब्लॉक करने का अधिकार देती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या विदेशी संबंधों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।
वहीं धारा 79(3)(बी) के तहत सरकार या उसकी एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आईटी मध्यस्थों को गैरकानूनी सामग्री हटाने या उस तक पहुंच रोकने के लिए नोटिस जारी कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों धाराओं का उद्देश्य भले ही ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण रखना हो, लेकिन दोनों के दायरे अलग हैं, इसलिए नोटिस जारी करते समय भाषा और कानूनी आधार स्पष्ट होने चाहिए।

नोटिस होंगे एकरूप और पारदर्शी
मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायिक जांच के योग्य बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि धारा 69ए के तहत जारी निर्देश और धारा 79(3)(बी) के तहत भेजे जाने वाले नोटिसों को अलग-अलग उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रम न रहे।
कृष्णन ने कहा कि सरकारी एजेंसियों को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और जिम्मेदारी से करना चाहिए, ताकि संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों और डिजिटल सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे।
नोटिस प्रारूप का मानकीकरण
संयुक्त सचिव (साइबर कानून) अजीत कुमार ने कहा कि नोटिसों में एकरूपता की कमी के कारण कई बार न्यायिक विवाद उत्पन्न होते हैं। इसलिए मंत्रालय अब नोटिसों के लिए मानकीकृत प्रारूप तैयार कर रहा है, जिसमें स्पष्ट कानूनी प्रावधान, कारणों का उल्लेख और उचित भाषा शामिल होगी।
कार्यशाला में हुई व्यापक चर्चा
कार्यशाला में भारतीय अपराध समन्वय केंद्र (I4C), विधिक कार्य विभाग (DOLA), भारतीय सेना, और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी शामिल हुए।
सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि अगर नोटिस प्रक्रिया में एकरूपता लाई जाए तो कानून के दुरुपयोग की आशंका कम होगी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं के प्रसार को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
डिजिटल युग में आईटी अधिनियम की धाराएँ केवल तकनीकी नियम नहीं, बल्कि डिजिटल जिम्मेदारी के मानक बन चुकी हैं। मंत्रालय की यह पहल इस दिशा में एक अहम कदम है — ताकि कानून का उपयोग न सिर्फ सख्ती से बल्कि स्पष्टता और निष्पक्षता के साथ हो।




















