बालोद।महिला एवं बाल विकास विभाग बालोद में संविदा भर्ती प्रक्रिया और योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आज हिंद सेना और कई सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। लेकिन जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और जांच के आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया गया।
हिंद सेना ने जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर भर्ती में गड़बड़ी, वित्तीय अनियमितता और शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठनों का कहना है कि विभाग में संविदा भर्ती के दौरान शासन की नियमावली को दरकिनार कर अपने चहेतों को पद दिलाने का प्रयास किया गया है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मिशन वात्सल्य योजना और चाइल्ड हेल्पलाइन में संविदा पदों पर भर्ती के दौरान पात्र उम्मीदवारों को अपात्र और अपात्र उम्मीदवारों को पात्र घोषित किया गया। आरोप यह भी है कि विभागीय कर्मचारियों द्वारा भर्ती सूची में बार-बार संशोधन कर फर्जी तरीके से चयन प्रक्रिया में हेराफेरी की गई है।
इसी तरह महतारी वंदन योजना में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। संगठनों का कहना है कि विभाग के कुछ स्थायी और उच्च आय वाले कर्मचारी—जो शासन के नियमों के अनुसार पात्र नहीं हैं—वे इस योजना का लाभ ले रहे हैं। आरोप है कि इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद संबंधित कर्मचारी ने विभाग में राशि वापस जमा की, जो कि भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है।
हिंद सेना ने यह भी कहा है कि विभाग में ऐसे कई अस्थायी कर्मचारी हैं जिनकी सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं या जो वित्तीय अनियमितता के दोषी रह चुके हैं, फिर भी उन्हें बार-बार संविदा पदों पर पुनर्नियुक्त किया जा रहा है। इसे संगठनों ने “घोर भ्रष्टाचार” करार दिया है।
प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने साफ कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
हिंद सेना पदाधिकारी ने कहा — “हमारी मांग है कि विभाग में चल रही भर्ती और योजनाओं की निष्पक्ष जांच हो। जो लोग शासन के नियमों से खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए, वरना हम सड़क पर उतरेंगे।”
वहीं प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उन्हें निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासन की इस पहल के बाद संगठनों ने आज का प्रस्तावित आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की, लेकिन चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में देरी हुई, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन आरोपों की सत्यता की जांच कितनी पारदर्शिता और तेजी से करता है।




















