
सूत्रों के मुताबिक, घटना तब भड़की जब कुछ ग्रामीणों ने तय दर पर शराब की मांग की। इस पर त्रिलोक गौतम के गुर्गों ने उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में हाथापाई हो गई और गुर्गों ने अतिरिक्त साथियों को बुलाकर ग्रामीणों के साथ मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते पूरा गांव आक्रोशित हो उठा और सभी ग्रामीण एकजुट होकर आरोपियों को घेर लिया।
पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस गांव पहुंची, लेकिन यहां ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पुलिस पर ही आरोप लगाया कि कई बार शिकायत के बावजूद केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि त्रिलोक गौतम की कारों से रोजाना बड़े पैमाने पर शराब की सप्लाई की जाती थी।

शुष्क दिवस पर भी खुलेआम बिक्री
2 अक्टूबर को गांधी जयंती और दशहरा के अवसर पर शुष्क दिवस घोषित था। इसके बावजूद जिला मुख्यालय के बस स्टैंड स्थित पान ठेला और होटल में खुलेआम दोगुने दाम पर शराब बिकती रही। चौंकाने वाली बात यह रही कि यह स्थान पुलिस सहायता केंद्र से महज 10-10 मीटर की दूरी पर हैं, फिर भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर पाई।
इधर मालीघोरी क्षेत्र में ग्रामीणों ने बताया कि रोजाना 15 से 20 पेटी तक शराब अवैध रूप से बेची जाती थी। शनिवार को हुए विवाद के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तकरीबन 498 पौवा शराब जब्त करने की बात सामने आई है।
अब गांव में छावनी जैसी स्थिति
घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब रोजाना इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बिक्री हो रही थी तो पुलिस क्यों चुप्पी साधे रही।
बहरहाल, देखना होगा कि इस घटना के बाद जिले में अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा कसने में पुलिस कितनी गंभीरता दिखाती है।




















