
प्रतिमा को ट्रैक्टर पर स्थापित किया गया, जिसके आगे पारंपरिक वाद्ययंत्र, डांग-डोरी और माता सेवा मंडली की सेवा गीत यात्रा को और भी भक्ति से सराबोर कर रहे थे। शोभायात्रा के दौरान दर्जनों भक्त माता की भक्ति में झूमने लगे जिन्हें ग्राम के बैगा ने ‘हुम् धूप’ देकर शांत कराया। जयकारों से गूंजते माहौल में प्रतिमा का भ्रमण कराने के बाद तालाब में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विसर्जन संपन्न हुआ।
ग्राम में हुआ विशाल भंडारा
महानवमी पर ग्राम मेढ़की के सभी घरों में चूल्हा नहीं जला। रात में हनुमान मंदिर प्रांगण में महिला, पुरुष और बच्चे कतारबद्ध बैठकर प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किए। यह भंडारा ग्राम की सामूहिक परंपरा का प्रतीक रहा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से धनराज गजपाल, भुखन लाल श्रीवास्तव, कमलेश श्रीवास्तव, अब्रेश हिरवानी, लक्ष्मी नारायण गजपाल, होरी लाल गजपाल, दिनेश गजपाल, चंद्रेश हिरवानी, परस साहू, संतोष पटेल, लिखन साहू, विक्की भारद्वाज, श्याम लाल साहू, राजू साहू, बरातू साहू, बैगा नंदकुमार साहू, विनोद ठाकुर, अभिजीत श्रीवास्तव, हेमंत साहू, तोमन साहू, चंद्रेश साहू, छबिल साहू, देवेंद्र साहू, सोनल भारद्वाज, पीयूष साहू, अमोल साहू, ओंकार भारद्वाज समेत बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए।
ग्रामवासियों की इस आस्था और सामूहिक आयोजन ने मेढ़की गांव को भक्ति और परंपरा की अनूठी छटा से सराबोर कर दिया।




















