रायपुर।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों की मैराथन बैठक ली। बैठक में पूंजीगत व्यय, शासकीय कामकाज की पारदर्शिता, जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की सराहना की और सभी को स्व-मूल्यांकन कर सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से शासन का कामकाज अधिक पारदर्शी हुआ है और यह सुशासन की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। अब दिसंबर 2025 तक सभी विभागों में ई-ऑफिस अनिवार्य रूप से लागू होगा।
पूंजीगत व्यय पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूत करता है और दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है। कम व्यय वाले विभागों को तुरंत गति लाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बजट में पिछले साल की तुलना में 18% अधिक प्रावधान है, इसलिए किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं होगी। प्रशासकीय स्वीकृति समय पर दी जाए, टेंडर शीघ्र जारी हों और कार्यों की शुरुआत बिना विलंब हो।

सड़क और निर्माण कार्यों पर जोर
बरसात खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अगले दो महीने निर्माण कार्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। सड़कों की मरम्मत और रखरखाव पर तेजी से काम हो, ताकि आवागमन सुगम हो सके।
जेम पोर्टल पर निगरानी
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जेम पोर्टल से शासकीय खरीदी में किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
जनता की समस्याओं को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने सचिवों से कहा कि जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और उनका त्वरित समाधान करें। प्रभारी सचिव हर दो माह में अपने-अपने जिलों का दौरा कर योजनाओं की गहन समीक्षा करेंगे।
मंत्रालय में बायोमैट्रिक अटेंडेंस
कामकाज में कसावट लाने के लिए 1 दिसंबर से मंत्रालय में उप सचिव से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से समय पर कार्यालय पहुँचने और अधीनस्थों को भी समयपालन के लिए प्रेरित करने को कहा।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव पी. दयानंद और सचिव राहुल भगत सहित सभी विभागीय सचिव और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।




















