नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राजधानी दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रख्यात अभिनेता मोहनलाल को वर्ष 2023 का दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी प्रदान किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि मोहनलाल ने कोमल से कठोर तक हर भाव को सहजता से अभिव्यक्त कर एक संपूर्ण अभिनेता की पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि महिला-केंद्रित फिल्मों का बढ़ता निर्माण और उन्हें सम्मान मिलना समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।
राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि इस वर्ष पुरस्कृत फिल्मों में ऐसी कहानियां शामिल हैं जिनमें माताएँ बच्चों के नैतिक मूल्यों को गढ़ती हैं, महिलाएँ सामाजिक रूढ़ियों का मुकाबला करती हैं, और पितृसत्ता की असमानताओं के विरुद्ध आवाज उठाती हैं। उन्होंने ऐसे संवेदनशील फिल्मकारों की सराहना की जिन्होंने समाज की सच्चाइयों को पर्दे पर सशक्त तरीके से प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे विविध समाज का प्रतिनिधित्व करता है। जिस प्रकार भारतीय साहित्य अनेक भाषाओं में रचा जाता है, उसी तरह भारतीय सिनेमा भी विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों से अपनी पहचान बना रहा है।
राष्ट्रपति ने ज़ोर देकर कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र में जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा—“किसी फिल्म के लिए लोकप्रियता अच्छी बात हो सकती है, लेकिन यदि वह जनहित में हो, विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए, तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है।”
अंत में, उन्होंने फिल्म उद्योग से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि भारतीय फिल्मों की वैश्विक पहचान बढ़ाने और उन्हें अधिकतम स्वीकृति दिलाने के लिए सतत प्रयास किए जाएं




















