
माता शैलपुत्री की आराधना से शुरुआत
नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। कई भक्तों ने नौ दिनों का कठिन व्रत रखा, तो कुछ पैदल यात्रा कर माता के दरबार तक पहुंचे। शाम को नगर और ग्रामीण अंचलों के प्रमुख मंदिर—शीतला मंदिर, चंडी मंदिर, मोखला मांझी और ठाड़ महामाया मंदिर—जसगीतों व भजनों से देर रात तक गूंजते रहे।

गंगा मैया मंदिर में भव्य आयोजन
झलमला स्थित मां गंगा मैया मंदिर में पहले दिन आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला। मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में दोपहर 12 बजे पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 1270 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए। बढ़ती भीड़ और मंदिर की ख्याति को देखते हुए इस बार ट्रस्ट ने सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था की गई है।

नौ दिनों तक धार्मिक कार्यक्रम
गंगा मैया मंदिर ट्रस्ट के अनुसार 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक प्रतिदिन विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। सुबह 7 बजे वृंदावन के आचार्य ओमप्रकाश शास्त्री और अन्य पंडितों द्वारा शतचंडी यज्ञ एवं दुर्गा सप्तशती का सस्वर पाठ किया जाएगा। वहीं 27, 28 और 29 सितंबर को दोपहर 2:30 बजे गरियाबंद के कथाव्यास महेश्वरानंद शरण संगीतमय शिव कथा का वाचन करेंगे। समापन दिवस 1 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे जय अंबे जस झांकी परिवार, अरकार द्वारा महिषासुर वध, नवदुर्गा की झांकी और विराट दर्शन की आकर्षक प्रस्तुति दी जाएगी।

श्रद्धालुओं के लिए अपील
मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखें और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें। नवरात्र के दौरान उमड़ने वाले जनसैलाब को देखते हुए श्रद्धालुओं से कतारबद्ध होकर दर्शन करने और अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही खड़े करने का आग्रह किया गया है।




















