बालोद/धमतरी। (पूनम शुक्ला) – हास्य-व्यंग्य की पैनी कलम से समाज की विसंगतियों को उजागर करने वाले वरिष्ठ कवि और साहित्यकार सुरजीत नवदीप का मंगलवार की रात निधन हो गया। 88 वर्ष की आयु में उन्होंने धमतरी के उपाध्याय नर्सिंग होम में रात 9:25 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल साहित्यिक जगत बल्कि पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में भी गहरा शोक व्याप्त है।

साहित्य का एक युग थमा
1 जुलाई 1937 को अविभाजित भारत के मंडी बहावलदीन (पंजाब, वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे सुरजीत नवदीप ने अपना जीवन धमतरी को समर्पित किया। एम.ए. (हिंदी), बी.एड. और सी.पी.एड. की शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने लंबे समय तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। शिक्षा जगत से सेवानिवृत्ति के बाद वे पूर्णत: साहित्य साधना में लीन हो गए।
वे धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक और छत्तीसगढ़ राज्य भाषा आयोग के सदस्य भी रहे। अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में उनके मंच संचालन की अद्वितीय शैली और सहज हास्य ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया।
कलम से निकले व्यंग्य, समाज को दिखाया आईना
नवदीप जी की लेखनी ने हमेशा समाज को हंसते-हंसते सच दिखाया। उनकी कविताएं और व्यंग्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि गहरी सोच जगाने का माध्यम थे।
उनकी चर्चित रचनाओं में लाजवंती का पौधा (उपन्यास), हवाओं में भटकते हाथ, कुर्सी के चक्कर में, शब्दों के अलावा आंसू हंसते हैं, रावण कब मरेगा, खाओ पियो खिसको और बुढ़ापा जिंदाबाद जैसे कृतित्व शामिल हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके काव्य पाठ ने उन्हें घर-घर तक पहचान दिलाई।

अंतिम यात्रा में छलके आंसू
बुधवार दोपहर को उनके निवास, डाक बंगला वार्ड (रत्नाबांधा चौक) से अंतिम यात्रा निकली, जो शांति घाट, दानी टोला में संपन्न हुई। इस दौरान साहित्यकारों, पत्रकारों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में आम लोग भी उपस्थित रहे। जनसैलाब ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

राजनीतिक हस्तियों की श्रद्धांजलि
सुरजीत नवदीप के निधन पर प्रदेशभर से शोक संदेशों की बाढ़ सी आ गई। बालोद भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा—
“नवदीप जी सिर्फ कवि नहीं, समाज के सजग प्रहरी थे। व्यंग्य की धार से उन्होंने हमें हंसाते हुए गहरे सत्य का बोध कराया। उनका जाना प्रदेश की साहित्यिक धरोहर के लिए अपूरणीय क्षति है।”
भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कहा—
“हास्य के माध्यम से गंभीर संदेश देना आसान नहीं होता, लेकिन नवदीप जी ने इसे साध लिया था। उनकी रचनाएं और उनकी जीवंत शैली पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहेंगी। आज हमने एक अनमोल रत्न खो दिया है।”
वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश यादव ने भावुक होकर कहा—
“उनका जीवन साहित्य और समाज के लिए समर्पित था। व्यंग्य के जरिए सच बोलने का उनका साहस अद्वितीय था। उनके जाने से साहित्य का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है।”
बालोद जिला प्रेस क्लब ने भी सुरजीत नवदीप के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। जिला प्रेस क्लब के पत्रकारों ने कहा कि “नवदीप जी की व्यंग्य रचनाएं समाज का आईना थीं। उनकी सहज और प्रेरणादायी शैली पत्रकारों व साहित्यकारों दोनों के लिए मार्गदर्शक रही। उनका जाना प्रदेश की साहित्यिक और बौद्धिक धरोहर के लिए अपूरणीय क्षति है।”
हमेशा याद रहेंगे नवदीप
सुरजीत नवदीप भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी कृतियां, उनकी शैली और उनकी स्मृतियां साहित्य जगत को सदैव आलोकित करती रहेंगी। उन्होंने जो बीज बोए हैं, वे आने वाली पीढ़ियों को सोचने, मुस्कुराने और समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देते रहेंगे।




















