बालोद। सड़क सुरक्षा और पीड़ित के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए, बालोद जिला न्यायालय ने एक अभूतपूर्व निर्णय सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) संजय कुमार सोनी ने एक गंभीर सड़क दुर्घटना में शामिल ट्रक को उसके मालिक को सौंपने की याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों को स्वीकार करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही से वाहन चलाने और कानून की अवहेलना करने वालों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 8 सितंबर, 2025 की है, जब बालोद निवासी सुप्रीत शर्मा अपने मित्र के साथ अपनी महिंद्रा 3XO कार (CG 24 V 5558) से यात्रा कर रहे थे। ग्राम पारागांव पुल के पास, लौह अयस्क से लदे एक तेज रफ्तार ट्रक (CG 06 L 1282) ने लापरवाही से ओवरटेक करते हुए उनकी कार को भीषण टक्कर मार दी। इस हादसे में सुप्रीत शर्मा और उनके मित्र चमत्कारिक रूप से बच गए, लेकिन उनकी गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार होने की कोशिश कर रहा था, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से पकड़ा गया। बालोद पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर ट्रक को जब्त कर लिया था।
न्यायालय में कानूनी लड़ाई
ट्रक मालिक ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जब्त वाहन को छुड़वाने के लिए CJM न्यायालय में सुपुर्दगी आवेदन दायर किया। इसके जवाब में, पीड़ित सुप्रीत शर्मा ने अपने अधिवक्ता धीरज उपाध्याय के माध्यम से एक सशक्त आपत्ति दर्ज कराई। पीड़ित पक्ष ने दलील दी कि दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए ट्रक को छोड़ना न्यायोचित नहीं होगा। उन्होंने न्यायालय को यह भी बताया कि ट्रक मालिक ने उन्हें धमकाते हुए दो दिन के भीतर ट्रक छुड़वाने का दावा किया था और ट्रक के फिटनेस व अन्य दस्तावेजों पर भी संदेह जताया।
न्याय का मजबूत स्तंभ: ऐतिहासिक निर्णय और उसका प्रभाव
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, माननीय CJM संजय कुमार सोनी ने मामले की गंभीरता को सर्वोपरि रखा। उन्होंने ट्रक मालिक की सुपुर्दगी याचिका को खारिज करते हुए पीड़ित पक्ष की आपत्तियों को सही माना। न्यायालय के इस फैसले की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। आम नागरिकों ने इसे उन ट्रक संचालकों के लिए एक कड़ा सबक बताया है जो अक्सर दुर्घटनाओं के बाद कानूनी दांव-पेंच का सहारा लेकर आसानी से बच निकलते हैं।
यह निर्णय न केवल सड़क पर लापरवाही को हतोत्साहित करेगा, बल्कि यह भी स्थापित करता है कि न्यायपालिका पीड़ितों की आवाज सुनने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस ऐतिहासिक फैसले ने सड़क सुरक्षा के मामलों में एक नई न्यायिक मिसाल कायम की है, जिससे भविष्य में ऐसे प्रकरणों में पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद प्रबल हुई है।




















