बालोद। गणेशोत्सव की रौनक इन दिनों पूरे बालोद जिले में देखते ही बन रही है। शहर के अलग-अलग समितियों ने आकर्षक गणेश प्रतिमाएं और भव्य पंडाल सजाए हैं। लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना है गंगासागर तालाब पार स्थित शिव मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति का पंडाल, जहां गणपति बप्पा एक अनोखे स्वरूप में विराजमान हैं।

महाभारत रचते गणेश
इस बार समिति ने भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा स्थापित की है, जिसमें वेदव्यास जी के मुख से निकली अमृत वाणी को गणेश जी अपनी लेखनी से महाग्रंथ का रूप देते दिख रहे हैं। यह दिव्य रूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और देखने वालों की भीड़ दिनभर लगी रहती है।

हर वर्ग की भागीदारी
समिति की पहल इस बार खास है। प्रतिदिन शाम 7 बजे होने वाली महाआरती में समाज के हर वर्ग को आमंत्रित किया जा रहा है। व्यापारी, सामाजिक संगठन, राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी, मूक-बधिर बच्चे और पत्रकार—सभी मिलकर आरती में शामिल हो रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि इस साझा भागीदारी से समाज में एकता और सद्भाव का संदेश जाएगा।

महाआरती का आलौकिक दृश्य
करहीभदर के पंडितों द्वारा विधिविधान से की जाने वाली आरती के दौरान पूरा गंगासागर तालाब पार गूंज उठता है। श्रद्धालु समय से पहले पहुंचकर आरती का इंतजार करते हैं और हर किसी को आरती उतारने का अवसर भी दिया जाता है। आरती के बाद महाप्रसाद वितरण से श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हैं।
लोग क्या कहते हैं
सुप्रीत शर्मा, समिति के सदस्य ने कहा “हमारी कोशिश है कि गणेशोत्सव को समाज को जोड़ने का जरिया बनाया जाए। जब हर वर्ग के लोग एक साथ बप्पा की आराधना करते हैं तो वातावरण अपने आप भक्तिमय और सकारात्मक हो जाता है।”
पं. आकाश पांडेय, पंडाल के पुजारी ने कहा “वेदव्यास और गणेश जी की यह झांकी भक्तों को ज्ञान और तपस्या का संदेश देती है। यह रूप हमें सिखाता है कि मेहनत और श्रद्धा से ही महान ग्रंथ और परंपराएं जन्म लेती हैं।”
चंद्रेश हिरवानी, राजनीतिक जनप्रतिनिधि ने कहा “शिव मित्र मंडल का यह प्रयास सराहनीय है। हर वर्ग को एक मंच पर जोड़कर यह आयोजन भाईचारे और सद्भाव का जीवंत उदाहरण बन गया है।”
अंचल प्रकाश साहू ने कहा “महाआरती में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। जिस तरह समिति हर किसी को आरती उतारने का अवसर देती है, वह श्रद्धालुओं के उत्साह को दोगुना कर देता है।”

शहरभर में गणेशोत्सव की धूम
बालोद के हर वार्ड और मोहल्ले में गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। गंजपारा, नया और पुराना बस स्टैंड, गांधी भवन, सदर रोड, बुधवारी बाजार, नांदगांव रोड से लेकर पुलिस लाइन तक हर जगह भक्ति का माहौल है। कहीं गुफा के आकार के पंडाल, तो कहीं बंगाली कारीगरों की कलाकृतियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
ग्रामीण अंचल भी भक्तिमय
ग्रामीण इलाकों में भी गणेशोत्सव का उत्साह देखने को मिल रहा है। युवा, बच्चे और महिलाएं घर-घर और मोहल्लों में प्रतिमाएं स्थापित कर उल्लास के साथ उत्सव मना रहे हैं।
बालोद का यह उत्सव इस बार सिर्फ भक्ति का नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सद्भाव का संदेश देने का प्रतीक बन गया है।




















