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मन की बात: आपदा के बीच उम्मीद, खेल और स्वदेशी का संदेश

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को मन की बात की 125वीं कड़ी में देशवासियों से संवाद किया। संबोधन की शुरुआत उन्होंने हाल की बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सेना, NDRF-SDRF और स्थानीय लोगों ने मानवीयता को सबसे ऊपर रखते हुए राहत-बचाव कार्य किया।

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की दो बड़ी उपलब्धियों की चर्चा की— पुलवामा में पहला डे-नाइट क्रिकेट मैच और श्रीनगर की डल झील पर आयोजित ‘खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल’। इसमें पूरे देश से 800 से ज्यादा खिलाड़ियों ने भाग लिया। ओडिशा की रश्मिता साहू और श्रीनगर के मोहसिन अली से बातचीत करते हुए उन्होंने खिलाड़ियों के जज्बे को सराहा और युवाओं से खेल को अपनाने का आह्वान किया।

मोदी ने UPSC अभ्यर्थियों के लिए शुरू किए गए नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘प्रतिभा सेतु’ का भी जिक्र किया। इसमें उन हजारों प्रतिभाशाली युवाओं का डाटा है जो अंतिम सूची में जगह न बना पाए, लेकिन अब निजी कंपनियां उन्हें नौकरी दे रही हैं।

उन्होंने मध्यप्रदेश के शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों का जिक्र करते हुए बताया कि जर्मनी के कोच डाइटमार बेयर्सडॉर्फर उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए आगे आए हैं।

प्रधानमंत्री ने सूरत के जितेंद्र सिंह राठौड़ की देशभक्ति की पहल को भी सराहा, जिन्होंने हजारों शहीदों की जानकारी और तस्वीरें संजोई हैं।

बिहार की “सोलर दीदी” देवकी का उदाहरण देते हुए मोदी ने बताया कि किस तरह एक सोलर पंप ने गांव की तस्वीर बदल दी और किसानों की आय बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा सिर्फ बिजली का साधन नहीं बल्कि गांव-गांव में नई रोशनी लाने वाली शक्ति है।

अपने संबोधन में उन्होंने इंजीनियर्स डे और विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं और सरदार पटेल के आर्काइव से उनकी आवाज भी सुनवाई। साथ ही हैदराबाद मुक्ति संग्राम और ऑपरेशन पोलो की चर्चा कर वीरों को नमन किया।

प्रधानमंत्री ने विदेशों में भारतीय संस्कृति की बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया। इटली में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा, कनाडा में 51 फीट ऊंची राम प्रतिमा और रूस के व्लादिवोस्तोक में रामायण प्रदर्शनी को उन्होंने भारतीय संस्कृति की वैश्विक छाप बताया।

अंत में उन्होंने त्योहारों के दौरान स्वदेशी अपनाने, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के मंत्र को दोहराया। साथ ही स्वच्छता को भी उत्सवों की असली रौनक बताया।

 

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