
कलेक्टर ने कार्यशाला को “राजस्व विभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि अधिकारी-कर्मचारी पूरे मनोयोग से नई जानकारियां आत्मसात करें और इन्हें व्यवहारिक कार्यों में लागू करें। उन्होंने कहा – “राजस्व कार्यों में पारदर्शिता और सटीकता जरूरी है। हर कर्मचारी को कानून की बारीकियों और डिजिटल प्रक्रियाओं की पूरी समझ होनी चाहिए।”
कार्यशाला में डिजिटल फसल सर्वेक्षण, स्वामीत्व योजना, अभिलेख शुद्धता, नक्शा बटांकन और विभागीय सॉफ्टवेयर के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। दो पालियों में चले इस प्रशिक्षण में राजस्व अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख, राजस्व निरीक्षक और पटवारी शामिल रहे।

प्रशिक्षक दीपचंद भारती ने नक्शा बटांकन, सीमांकन, खसरा विहीन नक्शा, जियोरेफ्रेंसिंग और छोटे भू-खंडों की बटांकन प्रक्रिया पर तकनीकी जानकारी दी। साथ ही राजस्व न्यायालय में लंबित मामलों और अभिलेख संशोधन की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी और अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक सहित अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए।
कलेक्टर ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विभागीय कार्यों को गति देने के साथ-साथ आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान में भी सहायक सिद्ध होंगी।




















