
अपने संबोधन में मोदी ने भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को निवेश, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहद सफल बताया। उन्होंने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने का न्योता देते हुए कहा कि भारतीय विकास यात्रा उनके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आई है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारत और जापान जैसे भरोसेमंद साझेदारों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते और भी ज्यादा अहम हो जाते हैं।
मोदी ने कहा कि भारत की राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत स्पष्टता और कारोबारी सुगमता के प्रयासों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका असर हाल ही में वैश्विक एजेंसियों की बेहतर क्रेडिट रेटिंग में साफ दिखता है। उन्होंने बताया कि भारत आज वैश्विक विकास में 18% योगदान दे रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया:
1. बैटरी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और परमाणु ऊर्जा में विनिर्माण
2. एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी में तकनीकी सहयोग
3. हरित ऊर्जा परिवर्तन
4. अगली पीढ़ी का इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाई-स्पीड रेल और लॉजिस्टिक्स
5. कौशल विकास और जन-जन के बीच मजबूत रिश्ते

जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि भारत की प्रतिभा और जापान की तकनीक मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और मजबूत बना सकती है। उन्होंने भारत-जापान साझेदारी के लिए तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया— पीपल-टू-पीपल कनेक्ट, तकनीक और बाजार का संयोजन, तथा हरित पहल और सेमीकंडक्टर जैसी अहम तकनीकों में सहयोग।
इस मौके पर 12वें भारत-जापान बिजनेस लीडर्स फोरम की रिपोर्ट दोनों नेताओं को सौंपी गई। जेईटीआरओ (जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन) के अध्यक्ष नोरिहिको इशिगुरो ने घोषणा की कि दोनों देशों की कंपनियों के बीच इस्पात, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में कई बी2बी समझौते हुए हैं।




















