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बालोद में गणेशोत्सव की धूम – प्राचीन और नई प्रतिमाओं के दर्शन से शहर हुआ आलोकित

बालोद। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बुधवार को विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का जयघोष गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने घर-घर और सार्वजनिक पंडालों में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना कर गणेशोत्सव की शुरुआत की। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कोई साइकिल तो कोई बाइक पर बप्पा को घर लाता दिखा। पंडालों को दुल्हन की तरह सजाया गया है, रात में रंग-बिरंगी रोशनी से नजारा मनमोहक हो उठा।

सार्वजनिक पंडालों में बप्पा का आगमन

शहर के बुधवारी बाजार, कचहरी चौक, बस स्टैंड, आमापारा, पुराना बस स्टैंड, सदर मार्ग, गांधी भवन, नयापारा, मोखला माझी मंदिर, गंगा सागर तालाब पार और तहसील कार्यालय समेत लगभग दर्जन भर स्थानों पर बड़ी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गईं। घरों में भी मिट्टी की प्रतिमाएं विराजीं।

भाजपा जिला कार्यालय में भी गणेश स्थापना
गणेशोत्सव के मौके पर भाजपा जिला कार्यालय, बालोद जुगेरा में भी श्री गणेश जी की स्थापना की गई। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख समेत दुर्जन साहू, संतोष चंद्राकर, बाल सिंह साहू, डॉ. बिरेन्द्र साहू, टिकेंद्र यादव, रेवाराम सिन्हा, हरीश गौतम महाराज और दानेश्वर द्विवेदी मौजूद रहे। सभी ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर संगठन और कार्यकर्ताओं की सफलता की कामना की।

बालोद की प्राचीन गणेश प्रतिमाएं बनी आस्था का केंद्र

गणेशोत्सव के बीच बालोद की पहचान उसके प्राचीन गणेश मंदिर भी हैं, जहां भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।

कपिलेश्वर मंदिर समूह (नयापारा): 13वीं-14वीं शताब्दी के नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित इस ऐतिहासिक मंदिर समूह में पत्थर से तराशी गई दो प्राचीन गणेश प्रतिमाएं आज भी विराजित हैं। यह स्थल पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

स्वयंभू गणेश मंदिर (मरारपारा): मान्यता है कि यहां भगवान गणेश स्वयं भूमि से प्रकट हुए थे। 11 दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

सिद्धिविनायक गणेश मंदिर (पाररास): मुख्य मार्ग पर स्थित इस मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

ठाड़ महामाया मंदिर: यहां महामाया दर्शन से पहले भक्त सबसे पहले गणपति का आशीर्वाद लेते हैं।

खुला संग्रहालय (बुढ़ापारा): यहां बारसूर से लाई गई पत्थर की प्राचीन गणेश प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र है।

10 दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

पूरे जिले में आने वाले 10 दिनों तक धार्मिक आयोजन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी। श्रद्धालु बप्पा से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करेंगे।

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