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“त्यौहार छोड़ आंदोलन पर डटीं NHM महिलाएं, नियमितीकरण को तीज की सौगात बनाने की मांग”

तीज पर भी आंदोलनरत रहीं NHM महिला कर्मचारी, सरकार से नियमितीकरण की मांग तेज

बालोद :- छत्तीसगढ़ में इस बार तीज का पर्व एक अलग ही अंदाज़ में दिखाई दिया। जहां महिलाएं परंपरागत रूप से करू भात (कड़वा अन्न) खाकर अपने मायके में उपवास करती हैं, वहीं एनएचएम की महिला कर्मचारी अपने घर–परिवार से दूर आंदोलन स्थल पर व्रत रखकर बैठी रहीं। इन महिलाओं ने साफ कहा कि सरकार को जगाना अब तीज मनाने से भी ज्यादा ज़रूरी है।

मटकी फोड़कर जताया विरोध

आंदोलनकारियों ने संविदा प्रथा का मुखौटा बनाकर एक मटकी तैयार की और उसे महिलाओं से फोड़वाया। उनका कहना था कि जैसे यह मटकी टूटी, वैसे ही प्रदेश से संविदा प्रथा खत्म होनी चाहिए और कर्मचारियों का नियमितीकरण होना चाहिए।

वादा टूटा, 20 महीने से इंतजार

एनएचएम कर्मचारियों का आरोप है कि भाजपा के घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी में संविदा कर्मियों को 100 दिन में नियमित करने का वादा था। लेकिन बीते 20 महीनों में 160 से अधिक ज्ञापन देने और निवेदन करने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

एक महिला कर्मचारी ने कहा—“आज तीज का पर्व है, मायके जाना था… लेकिन हमने अपना त्योहार कुर्बान किया, ताकि सरकार को जगा सकें और अपने बच्चों को नियमितीकरण की सौगात दे सकें।”

10 सूत्रीय मांगों के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल

राज्यभर के 16,000 से अधिक एनएचएम कर्मचारी नियमितीकरण/सविलियन, ग्रेड पे, लंबित 27% वेतन वृद्धि समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। बालोद समेत सभी जिलों में रोज़ाना कर्मचारी धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नुक्कड़ नाटक और प्रतीकात्मक तरीकों से सरकार तक संदेश पहुंचा रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान

इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव, पैथोलॉजी जांच, टीबी–मलेरिया नियंत्रण, नवजात शिशु देखभाल, चिरायु (RBSK) परीक्षण और आपातकालीन सेवाएं संचालित होती हैं। लेकिन हड़ताल के चलते ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं लगभग ठप हो गई हैं। कई अस्पतालों में ताले लटक गए हैं, ओटी बंद हैं और प्रसव सेवाएं भी बाधित हो चुकी हैं।

सरकार को चेतावनी

कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक सभी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि अगर सरकार ने ठोस पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में प्रदेश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पंगु हो सकती है।

 

 

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